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मां ने ही कर दिया कलेजे के टुकड़े का सौदा… मकान के लालच में जन्म से 3 माह पहले हुआ सौदा, फिर ऐसे खुला राज

Lucknow Crime News: सोचिए, जिस मां की गोद बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती है, वही अगर अपने जिगर के टुकड़े का सौदा कर दे तो क्या? जी हां, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से ऐसी ही एक सनसनीखेज घटना सामने आई है. लेकिन, एक गुमनाम फोन कॉल ने उस साजिश का पर्दाफाश कर दिया. पढ़िए पूरी खबर-

By: Lalit Kumar | Published: August 6, 2026 3:47:42 PM IST



Lucknow Crime News: सोचिए, जिस मां की गोद बच्चे के लिए सबसे सुरक्षित मानी जाती है, वही अगर अपने जिगर के टुकड़े का सौदा कर दे तो क्या? जी हां, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से ऐसी ही एक सनसनीखेज घटना सामने आई है. लेकिन, एक गुमनाम फोन कॉल ने उस साजिश का पर्दाफाश कर दिया, जिसमें जन्म से पहले ही महज एक मकान के लालच में मासूम की कीमत तय कर दी गई थी. कुर्सी रोड स्थित सेंट मेरी पॉलीक्लीनिक में जन्मे दो दिन के नवजात को बेचने की तैयारी थी, लेकिन सूचना मिलते ही एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट ने कार्रवाई कर बच्चे की मां और खरीददार महिला को गिरफ्तार कर लिया. जांच में खुलासा हुआ कि यह सौदा अचानक नहीं, बल्कि बच्चे के जन्म से करीब तीन महीने पहले ही पूरी प्लानिंग के साथ तय कर लिया गया था. 

पुलिस के अनुसार, आरती नाम की महिला पहले से तीन बच्चों की मां है. उसने चौथे बच्चे को दूसरी महिला रेनू को देने का फैसला किया था. दोनों की मुलाकात एक व्यक्ति के माध्यम से हुई थी. 

मकान की जरूरत ने मां को बना दिया लालची

पुलिस पूछताछ में आरती ने बताया कि रेनू की कोई संतान नहीं थी. इसीलिए रेनू ने बच्चे के बदले उसका मकान बनवाने का वादा किया था. शर्त यह थी कि बच्चा जन्म लेते ही उसे सौंप दिया जाएगा, ताकि वह उसका पालन-पोषण कर सके. इसी सहमति के आधार पर बच्चे के जन्म के दो दिन बाद नवजात रेनू को दे दिया गया. 

कैसे खुला मामला

बच्चे के सौदाबाजी मामले ने नया मोड़ तब लिया, जब जांच में पता चला कि अस्पताल में भर्ती के समय आरती ने अपना नाम रेनू बताया था. पुलिस अब यह पता लगा रही है कि अस्पताल के रिकॉर्ड में प्रसूता की पहचान कैसे बदली गई और इसमें किसकी भूमिका रही.

डॉक्टरों पर धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज

मामले में अस्पताल संचालक डॉ. शालू, डॉ. विनोद समेत अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और किशोर न्याय अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है.

अस्पताल प्रशासन क्या बोला

अस्पताल संचालक डॉ. शालू का कहना है कि महिला ने भर्ती के समय अपना नाम रेनू बताया था. बाद में दस्तावेजों में आरती नाम मिलने पर रिकॉर्ड में सुधार कर दिया गया था. उनका दावा है कि बच्चा उसी महिला को सौंपा गया, जिसने अस्पताल में प्रसव कराया था.

क्या कहती है पुलिस

एडीसीपी किरण यादव ने बताया कि पुलिस सेंट मेरी पॉलीक्लीनिक में हाल के दिनों में हुए सभी प्रसव और नवजातों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है. वहीं, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एनबी सिंह ने कहा कि पुलिस जांच कर रही है और आवश्यकता पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग हर संभव सहयोग देगा. 

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