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डॉक्टर की नौकरी छोड़ बने IPS, 100 से ज्यादा एनकाउंटर में नाम; अब हत्याकांड में अनाथ हुईं 2 बच्चियों की जिम्मेदारी उठाएंगे Encounter Specialist अफसर!

Encounter Specialist IPS Anil Kumar: डॉक्टर की नौकरी छोड़ IPS बने डॉ. अनिल कुमार का सफर बेहद प्रेरणादायक है. 100 से ज्यादा एनकाउंटर के लिए चर्चित IPS अफसर अब हत्याकांड में अनाथ हुईं दो मासूम बच्चियों की जिम्मेदारी उठाएंगे.

By: Kajal Jain | Published: October 2, 2026 6:30:25 PM IST



Encounter Specialist IPS Anil Kumar: उत्तर प्रदेश पुलिस के तेजतर्रार और दबंग आईपीएस अधिकारी डॉ. अनिल कुमार इन दिनों अपनी बहादुरी के साथ-साथ एक बेहद संवेदनशील और मानवतावादी फैसले को लेकर सुर्खियों में हैं. आजमगढ़ के एसएसपी के पद पर तैनात इस ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ अधिकारी ने हाल ही में शंभूपुर गांव में हुई एक सनसनीखेज गोलीबारी की घटना में अनाथ हुई दो मासूम बच्चियों को गोद लेने का ऐतिहासिक ऐलान किया है. एक तरफ जहां उन्होंने अपनी जांबाजी और 100 से अधिक सफल एनकाउंटर ऑपरेशंस से अपराधियों के दिलों में खौफ पैदा किया है, वहीं दूसरी तरफ उनका यह मानवीय कदम खाकी वर्दी के दूसरे खूबसूरत और रक्षक रूप को बयां करता है. 

कभी डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले और झारखंड के ग्रामीण सरकारी स्कूलों से फर्श पर बैठकर पढ़ाई करने वाले अनिल कुमार का यह सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है. उनके पिता एक सरकारी शिक्षक थे, जिन्होंने अभावों के बावजूद उन्हें पढ़ाया. एमबीबीएस की डिग्री हासिल करने के बाद जब उन्होंने अपने मेडिकल कॉलेज के सीनियर्स को यूपीएससी (UPSC) क्रैक करते देखा, तो उनके भीतर प्रशासनिक सेवा में जाने की अलख जगी. 

सफेद कोट छोड़कर देश सेवा की खाकी चुनने वाले डॉ. अनिल कुमार आज न सिर्फ उत्तर प्रदेश के सबसे खूंखार अपराधियों का सफाया करने वाले एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में जाने जाते हैं, बल्कि वे युवाओं और सिविल सेवा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए एक बड़े मार्गदर्शक भी हैं.

डॉक्टर के कोट से लेकर खाकी वर्दी तक का सफर

झुंझुनू जिले से ताल्लुक रखने वाले डॉ. अनिल कुमार का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा था. उनके दादाजी की इच्छा थी कि वह डॉक्टर बनें, इसलिए उन्होंने डॉ. संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की और कुछ समय तक दिल्ली के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में जूनियर डॉक्टर के रूप में भी सेवा दी. लेकिन समाज के लिए कुछ बड़ा करने की उनकी छटपटाहट उन्हें सिविल सेवा की ओर खींच लाई.

अपने मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र को अलविदा कहा और प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी में जुट गए. आखिरकार अपनी कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने 2016 बैच के यूपीएससी (UPSC) परीक्षा में सफलता हासिल की और आईपीएस अधिकारी बने.

‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ के रूप में क्यों मिली पहचान?

उत्तर प्रदेश पुलिस में अपने कार्यकाल के दौरान डॉ. अनिल कुमार की गिनती राज्य के सबसे खतरनाक और मारक ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ अधिकारियों में होती है. उन्होंने अपने अब तक के करियर में कई हाई-प्रोफाइल और कुख्यात अपराधियों के खिलाफ कड़े एक्शन लिए हैं, जिनके नाम से पूरा इलाका कांपता था.

उनके सटीक ऑपरेशंस के कारण ही अपराधियों में कानून का खौफ कायम हुआ है. उनकी इस उत्कृष्ट और साहसी सेवा के लिए उन्हें शासन द्वारा कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है. उन्हें 26 जनवरी 2021 को डीजीपी की सिल्वर डिस्क, 26 जनवरी 2023 को गोल्ड डिस्क और 15 अगस्त 2025 को प्लेटिनम डिस्क से सम्मानित किया जा चुका है.

अनाथ बच्चियों के लिए मसीहा बने एसएसपी

हाल ही में आजमगढ़ के शंभूपुर गांव में एक दिल दहला देने वाली वारदात हुई, जहां एक व्यक्ति अरविंद सिंह ने अपनी पत्नी, बेटे और घर पर आए दो पुजारियों की गोली मारकर हत्या कर दी थी. पुलिस की जवाबी कार्रवाई में मुख्य आरोपी भी मुठभेड़ में मारा गया, लेकिन इस खूनी संघर्ष में आरोपी की दो मासूम बेटियां (एक 11 महीने और दूसरी 11 साल की) दुनिया में अकेली रह गईं.

ऐसे संकट के समय एसएसपी डॉ. अनिल कुमार इन बच्चियों के लिए फरिश्ता बनकर सामने आए. उन्होंने न सिर्फ इन दोनों बच्चियों को गोद लेने का साहसिक फैसला लिया, बल्कि उनके सुरक्षित भविष्य के लिए अपने एक महीने के वेतन से फिक्स डिपॉजिट (FD) करने की घोषणा की. उनकी इस प्रेरणादायक पहल से प्रभावित होकर पूरी आजमगढ़ पुलिस टीम ने भी एक दिन का वेतन इन बच्चियों की मदद के लिए देने का संकल्प लिया है.

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