UP Religious Conversion: उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर धर्मांतरण और भूमि अतिक्रमण जैसे मुद्दों पर अपनी सरकार की नीति और सोच को स्पष्ट करते हुए कहा कि किसी भी सामाजिक चुनौती का समाधान केवल कानूनी प्रावधानों से नहीं हो सकता. इसके लिए समाज को भी जागरूक, संगठित और जिम्मेदार बनना होगा. लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में सीएम ने भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं, रामायण के प्रसंगों और सामाजिक चेतना का उल्लेख करते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की. उन्होंने कहा कि समाज के सामने आने वाली अनेक चुनौतियों का समाधान भारतीय संस्कृति और परंपराओं में मौजूद है. जरूरत इस बात की है कि लोग अपने इतिहास, मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझें तथा उन्हें व्यवहार में भी अपनाएं.
रामायण के प्रसंग से दिया सामाजिक एकता का संदेश
सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन के दौरान रामायण का उल्लेख करते हुए कहा कि माता सीता के अपहरण के बाद भगवान राम ने केवल व्यक्तिगत संघर्ष नहीं किया था, बल्कि समाज को एकजुट कर अन्याय के खिलाफ खड़ा होने का संदेश भी दिया था. उन्होंने कहा कि भगवान राम ने उत्तर से दक्षिण तक लोगों को जोड़कर एक बड़ा सामाजिक अभियान खड़ा किया था. यह प्रसंग केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं है, बल्कि समाज को संगठित और जागरूक रहने की प्रेरणा भी देता है. सीएम के अनुसार भारतीय संस्कृति में महिलाओं के सम्मान और गरिमा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है और किसी भी प्रकार के छल, दबाव या प्रलोभन के जरिए किसी की स्वतंत्रता या पहचान को प्रभावित करने के प्रयास को गंभीरता से लिया जाना चाहिए.
धर्मांतरण रोकने के लिए कानून के साथ जनजागरूकता भी जरूरी
सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2020 में अवैध धर्मांतरण को रोकने के लिए कानून लागू किया था. हालांकि उनका मानना है कि केवल कानून बना देने से किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता. उन्होंने कहा कि लोगों को अपने अधिकारों, कानूनी प्रावधानों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होना चाहिए. यदि समाज सतर्क रहेगा तो किसी भी संदिग्ध गतिविधि को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है और सरकार के साथ समाज को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी.
जरूरी है सतत संवाद
सीएम ने कहा कि धर्मांतरण का विषय नया नहीं है और इस पर अतीत में भी कई बार चर्चा हो चुकी है. विभिन्न न्यायिक टिप्पणियों और सामाजिक बहसों में भी यह मुद्दा उठता रहा है. उन्होंने कहा कि जब किसी विषय का प्रभाव समाज पर दूरगामी हो, तब उस पर समय रहते संवाद और जागरूकता आवश्यक हो जाती है. इसी सोच के तहत राज्य सरकार ने कानून बनाने के साथ-साथ लोगों को जागरूक करने पर भी विशेष जोर दिया है.
समाज जितना सजग होगा, चुनौतियां उतनी कमजोर होंगी
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इतिहास गवाह है कि हर दौर में कुछ ऐसी शक्तियां सक्रिय रही हैं जो समाज में भ्रम, विभाजन या असंतुलन पैदा करने का प्रयास करती हैं. लेकिन असली सवाल यह नहीं है कि ऐसी प्रवृत्तियां मौजूद हैं या नहीं, बल्कि यह है कि समाज उनके प्रति कितना जागरूक है. उन्होंने कहा कि यदि समाज संगठित, जागरूक और सतर्क रहेगा तो किसी भी नकारात्मक गतिविधि को सफल होने का अवसर नहीं मिलेगा. सीएम ने परिवार और समाज दोनों स्तरों पर संवाद बढ़ाने तथा सामाजिक एकता को मजबूत करने पर जोर दिया.
भूमि अतिक्रमण पर भी दोहराया सख्त रुख
धर्मांतरण के मुद्दे के साथ सीएम ने भूमि अतिक्रमण और अवैध कब्जों पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उपयोग और धार्मिक महत्व वाली भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी है. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे को स्वीकार नहीं किया जा सकता और राज्य सरकार इस दिशा में लगातार कार्रवाई कर रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि आगे भी कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी.सीएम के अनुसार भूमि विवाद केवल कानूनी मसला नहीं होते, बल्कि उनका सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव भी होता है. इसलिए ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और सतर्कता दोनों जरूरी हैं.
युवाओं से की संस्कृति और इतिहास को समझने की अपील
अपने संबोधन के अंत में सीएम ने युवाओं से भारतीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं को समझने और उनसे जुड़ने की अपील की. उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक परंपराओं से है. यदि समाज अपनी जड़ों से जुड़ा रहेगा तो वह हर चुनौती का सामना अधिक मजबूती से कर सकेगा. योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि आज का दौर सूचना और तकनीक का युग है. ऐसे में लोगों के लिए यह समझना और भी महत्वपूर्ण हो गया है कि सही जानकारी और अफवाहों में क्या अंतर है. उन्होंने लोगों से तथ्यों, कानून और जागरूकता के आधार पर आगे बढ़ने का आह्वान किया.