कनई दिल्ली. नरेंद्र मोदी सरकार का आखिरी फुल बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया. इससे मिडिल क्लास और नौकरी पेशा वर्ग की उम्मीदों को झटका लगा है. लेकिन वित्त मंत्री ने 40 हजार के स्टैंडर्ड डिडक्शन का एेलान करके टैक्स लगने की आय 2.50 लाख से बढ़ाकर 2.90 लाख कर दी है. लेकिन बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन 40 हजार करने के साथ-साथ 19200 रुपए का ट्रांसपोर्ट और 15000 रुपए का मेडिकल अलाउंस वापस लेने का भी प्रस्ताव है जिसका सीधा मतलब ये है कि टैक्स वाली कमाई की गिनती में मात्र 5800 रुपए का फायदा होगा.

कोई नौकरी-पेशा वाला असल में कितना टैक्स बचाएगा, यह इनकम टैक्स स्लैब से तय होगा. जो अभी 5 प्रतिशत आयकर दे रहे हैं, वो 290 रुपये की बचत करेंगे. 20 प्रतिशत और 30 प्रतिशत इनकम टैक्स देने वाले क्रमश: 1160 और 1740 रुपये की बचत करेंगे. बचत का फायदा मेडिकल और एजुकेशन सेस के कारण घाटे में बदल जाएगा जिसे 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 4 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है. नतीजन जो लोग टैक्स देते हैं वो स्टैंडर्ड डिडक्शन के बावजूद असल में ज्यादा टैक्स चुकाएंगे.

इस समय 15000 रुपये का मेडिकल और 19200 रुपये का ट्रांसपोर्ट अलाउंस है जो कंपनी रिइम्बर्स करती है. इसे मनमोहन सिंह सरकार में वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने 2005-06 में शुरू करते हुए स्टैंडर्ड डिडक्शन को खत्म कर दिया था. अरुण जेटली ने उस स्टैंडर्ड डिडक्शन को वापस लाकर अलाउंस खत्म करने का प्रस्ताव रखा है. स्टैंडर्ड डिडक्शन के 40000 की छूट को जब मेडिकल और ट्रांसपोर्ट अलाउंस के 34200 रुपए से घटाते हैं तो पता चलता है कि असल में टैक्स के दायरे में आने वाली कमाई पर मात्र 5800 रुपए की छूट बढ़ी. और टैक्स देने पर लगने वाले सेस की वजह से वो असल में कोई फायदा देने के बदले पॉकेट का नुकसान ही करेगा.

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बजट भाषण में बताया कि देश में डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 12.5 परसेंट बढ़ा (90 हजार करोड़) है और टैक्स देने वालों की संख्या भी 19.25 लाख बढ़ी है. जेटली ने बताया कि राजकोषीय घाटा 5.95 लाख करोड़ रुपये है जो देश की अर्थव्यवस्था का 3.5 परसेंट हैं. सरकार ने 250 करोड़ रुपये टर्नओवर वाली कंपनियों को 25 फीसदी तक की छूट देने का प्रस्ताव रखा है जो कॉरपोरेट टैक्स में 5 परसेंट का फायदा है.

ऐसे Calculate करें अपना टैक्स

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