Monday, August 15, 2022

Vice President Election: NDA उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने मार्गरेट अल्वा को हराया, बनें उपराष्ट्रपति

नई दिल्ली : उपराष्ट्रपति चुनावों का परिणाम सामने आ चुका है. NDA उम्मीदवार जगदीप धनखड़ देश के अगले उपराष्ट्रपति होंगे. आज उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए संसद में मतदान हुआ था. मतदान की प्रक्रिया सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चली थी. अब मतगणना पूरी हो चुकी है. जानकारी के अनुसार जगदीप धनखड़ को एक तिहाई से अधिक वोेट मिले हैं. उन्होंने विपक्ष की संयुक्त उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया है.  धनखड़ को 528 वोट मिले हैं. बता दें, उपराष्ट्रपति चुनावों में 725 सांसदो ने मतदान किया था. जिसमें से 15 वोट अमान्य हो गया था.

मार्गरेट अल्वा को मिले 182 वोट

देश के मौजूदा उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू का कार्यकाल 10 अगस्त को समाप्त होने जा रहा है. अब जगदीप धनखड़ वेंकैया नायडू के बाद देश के अगले उपराष्ट्रपति बनेंगे. उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के लिए शनिवार सुबह 10 बजे मतदान शुरू हुआ जो शाम 5 बजे खत्म हुआ. मतदान के बाद शाम 6 बजे मतगड़ना हुई. जिसके नतीजे सामने आ चुके हैं. बता दें, उपराष्ट्रपति पद के लिए NDA ने जगदीप धनखड़ और विपक्ष ने मार्गरेट अल्वा को उम्मीदवार बनाया था. इस चुनाव में जहां धनखड़ को 528 वोट मिले वहीं विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को 182 वोट मिले हैं.

 निजी जीवन

आज हम आपको पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल और उप राष्ट्रपति चुनाव में सत्ताधारी NDA के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ के जीवन के कुछ ऐसे पहलुओं को बताने जा रहे हैं जिसे शायद ही आप जानते होंगे. जयपुर से करीब 200 किमी दूर झुंझुनूं जिले में बसा गाँव किठाना जगदीप धनखड़ का गांव है. गाँव में रहने वाले जगदीप धनखड़ के सबसे करीबी दोस्त और प्राइमरी तक साथ पढ़े सेना से रिटायर्ड हवलदार हजारीलाल ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने एक चैनल को जगदीप धनखड़ के बचपन की कुछ खास लमहों के बारे में बताया.

सियाही में रंग जाते थे हाथ

बुजुर्ग हजारीलाल बताते हैं कि ‘मेरा बचपन का दोस्त है जगदीप, हम दोनों साथ ही पढ़े हैं’. चार भाई बहनों में दूसरे नंबर के बेटे हैं. बड़े भाई कुलदीप धनखड़ और जगदीप से छोटे रणदीप और बहन इंद्रा में खूब प्यार है. आज तक उनके बड़े भाई कुलदीप उन्हें डांट-फटकार देते हैं और जगदीप भी इसे सहज लेते हैं. हजारीलाल बताते हैं कि धनखड़ शुरू से पढ़ाई में बहुत होशियार थे लेकिन इसके साथ-साथ वह खूब मस्ती भी किया करते थे. वह पढ़ाई में इतने लीन रहते थे की उनके हाथ हमेशा सियाही में ही रंगे रहते. इस वजह से टीचर्स भी उन्हें खूब प्यार दिया करते. जब भी बचपन में उन्हें समय मिलता तो वह कपड़े की गेंद बना कर खेला करते. उन्होंने बताया कि वह और धनखड़ दोनों गांव के स्कूल में पढ़े लेकिन बाद में जगदीप धनखड़ चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल चले गए.

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