नई दिल्ली:

समूचे विश्व में अब भारत की ताकत और अभेद हो जाएगी। दुनिया के सबसे आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम माने जाने वाले एस-400 की पहली खेप देश में पहुंच गई है। रुस में निर्मित इस डिफेंस सिस्टम को अमेरिका के मिसाइल डिफेंस सिस्टम से भी बेहतर माना जाता है। यानि अब हम चीन और पाकिस्तान के हवाई हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने को तैयार हैं। गौरतलब है कि पड़ोसी मुल्क चीन के पास खतरनाक बैलेस्टिक मिसाईलों और अच्छे फाइटर एयरक्राफ्ट का बड़ा जखीरा उपलब्ध है।

रूस ने निभाई दोस्ती

रूस के साथ भारत की इस डील पर अमेरिका ने कड़ी आपत्ति जताई थी और CAATSA एक्ट के तहत प्रतिबंध लगाने की धमकी तक दी थी। लेकिन भारत अपनी रक्षा जरूरतों के फैसले पर डटा रहा। रुस ने भी पूरा समर्थन दिया। 5 अक्टूबर 2018 को दोनों देशों के बीच 5.43 बिलियन डॉलर यानी करीब चालीस हजार करोड़ रुपए में S-400 की पांच यूनिट का सौदा तय हुआ। पहली खेप के बाद अगले साल जून में इसकी दूसरी खेप भी आ सकती है। डील के मुताबिक भारत को ऐसी कुल 5 यूनिट मिलेंगी।

एस-400 की विशेषता

रूस के एलमाज सेंट्रल डिजाइन ब्यूरो द्वारा निर्मित एस-400 एक एयर डिफेंस सिस्टम है। यानि ये हवा के जरिए हो रहे अटैक को रोकता और मारता है। दुश्मन देशों के मिसाइल, ड्रोन, राकेट लॉन्चर और फाइटर जेट्स को एस-400 हवा में ही मार गिराता है। इसमें 92N6E इलेक्ट्रॉनिकली स्टीयर्ड फेज्ड ऐरो रडार लगा हुआ है जो करीब 600 किलोमीटर की दूरी से 80 टारगेट्स को डिटेक्ट कर सकता है। सिग्नल मिलने पर सिर्फ 3 मिनट के भीतर ये 30 किलोमीटर की उंचाई और 400 किलोमीटर की रेंज में हमला कर सकता है। ट्रकों पर तैनात किया जा सकने वाला यह मिसाइल सिस्टम एक साथ 36 टारगेट पर निशाना लगा सकता है। एस-400 एयर सिस्टम को जैम नहीं किया जा सकता।

बौखलाए चीन और पाकिस्तान

पड़ोसी मुल्क चीन और पाकिस्तान हमेशा भारत की सुरक्षा व्यवस्था पर हमला करते रहे हैं। ऐसे में एस-400 देश में आ जाने पर उनकी नजरें जरुर टेढ़ी होंगी। भारत ने खतरे को भांपते हुए एस-400 सिस्टम को पंजाब सेक्टर में तैनात किया है। यहां से पाकिस्तान और चीन दोनों से एक साथ निपटा जा सकता है।

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