July 21, 2024
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BBC Documentry : DU की आर्ट्स फैकल्टी में बवाल, धारा 144 लागू…पुलिस हिरासत में छात्र

  • WRITTEN BY: Riya Kumari
  • LAST UPDATED : January 27, 2023, 4:25 pm IST

नई दिल्ली: बीबीसी की विवादित डाक्यूमेंट्री को लेकर अब दिल्ली यूनिवर्सिटी में भी बवाल देखने को मिल रहा है. इस समय दिल्ली की चार यूनिवर्सिटी में बवाल जारी है जिसमें से अंबेडकर यूनिवर्सिटी में डॉक्‍यूमेंट्री स्‍क्रीनिंग से ठीक पहले बिजली काट दी गई थी. अब खबर सामने आ रही है कि NSUI-KSU द्वारा फैकल्टी में BBC डॉक्‍यूमेंट्री की स्‍क्रीनिंग को लेकर सुरक्षाकर्मी किए गए हैं. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फैकल्टी के बाहर धारा 144 लागू कर दी गई है. जानकारी के अनुसार बीबीसी डॉक्यूमेंटरी की स्क्रीनिंग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को पुलिस ने अब हिरासत में ले लिया है.

DCP नॉर्थ भी मौके पर

दिल्ली यूनिवर्सिटी में आर्ट्स फैकल्‍टी के बाहर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात हो गए हैं.आयोजित किए जाने के चलते ये कदम उठाया गया है. यूनिवर्सिटी प्रशासन ने आयोजन की इजाजत नहीं दी है. कर दी गई है. बता दें, यूनिवर्सिटी में शाम 4 बजे डॉक्‍यूमेंट्री की स्‍क्रीनि‍ंग की जानी थी जिसे लेकर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. इसके अलावा DCP नॉर्थ भी मौके पर पहुंचे हुए हैं.

AMU में लगाए गए धार्मिक नारे

जामिया और जवाहर लाल यूनिवर्सिटी के बाद अब बीबीसी डॉक्यूमेंटरी मामला AMU पहुंच गया है. गुजरात दंगों पर बनी डॉक्यूमेंटरी की स्क्रीनिंग को लेकर देश भर के विश्वविद्यालयों में लेफ्ट समर्थित छात्र संगठन मांग कर रहे हैं. इसी कड़ी में AMU में छात्रों द्वारा विवादित नारेबाजी का मामला सामने आया है. जहां नारेबाजी करने वाले छात्र की पहचान की जा चुकी है. जानकारी के अनुसार छात्र को निलंबित कर दिया गया है. मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई है. बता दें, जामिया यूनिवर्सिटी में भी दो दिन पहले इस डॉक्यूमेंटरी को लेकर बड़ा बवाल हुआ था. इसके बाद देश भर की यूनिवर्सिटी में लेफ्ट समर्थित छात्रों का विरोध प्रदर्शन सामने आ रहा है. जहां छात्र बीबीसी की विवादित डॉक्यूमेंटरी को कैंपस में दिखाए जाने की मांग कर रहे हैं.

क्या है पूरा विवाद?

बीबीसी की यह डॉक्यूमेंट्री दावा करती है कि उन्होंने अपने स्तर पर साल 2002 में होने वाले गुजरात दंगों से जुड़े कुछ पहलू की पड़ताल की है. बता दें, दंगों के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही गुजरात के मुख्यमंत्री थे. इस डॉक्यूमेंटरी में ब्रिटिश सरकार की एक खुफिया रिपोर्ट के हवाले से बताया गया है कि गुजरात दंगों में एथनिक क्लेंज़िंग के निशान थे. इसी डॉक्यूमेंटरी और दावों से सारा बवाल शुरू हुआ जहां विवाद को बढ़ता देख सरकार ने कथित रूप से यूट्यूब और ट्विटर लिंक को हटाने के आदेश दिए हैं.

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