नई दिल्ली : New Delhi

अटल बिहारी बाजपेयी Atal Bihari Vajpayee एक बहुआयामी व्यक्तित्व, वाक्पटुता के महाधनी, शिष्ट हाजिर जवाब, मुखर आलोचल, प्रखर वक्ता, बड़े कवि, पत्रकार और भारत के तीन बार प्रधानमंत्री बनने वाले राजनेता थे. अटल बिहारी बाजपेयी को अजात शत्रु भी कहा जाता है. अजात शत्रु का मतलब जिसका कोई शत्रु न हो यानि जो अपने शत्रुओं को भी मित्र बना ले.

अटल बिहारी हमेशा विपक्ष का अहम चेहरा होते थे. और ऐसा कहा जाता है. कि वे अकेले ही सम्पूर्ण विपक्ष होते थे. जो अपने तर्कों, तथ्यों और हाजिर जवाबी से सत्तापक्ष व विरोधियो चित्त कर देते थे. वे पहले लोकसभा या फिर राज्यसभा से संसद पहुंचते थे. कुल मिलाकर वे सदन में पहुंचते जरूर थे. उनका मानना था कि विपक्ष में विरोध होता है शत्रुता नहीं. वो ऐसे जन नेता थे जो अपनी कविताओं से साथी और विरोधी दोनों का दिल जीत लिया करते थे. कवित्व का गुण उनमें जन्मजात था जो विरासत उन्हें पिता से मिला था.

अटल जी का प्रारम्भिक जीवन

अटल जी का जन्म मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के बटेश्वर गांव में एक मध्यवर्गीय परिवार में 25 दिसम्बर सन् 1924 हुआ. उनके पिता जी भी  एक शिक्षक और कवि थे. जिनका नाम कृष्ण बिहारी वाजपेयी था. अटल जी की मां का नाम कृष्णा देवी था जो एक गृहणी थी. अटल जी कुल सात भाई-बहन थे. अटल जी ने हाई स्कूल सरस्वती शिक्षा मन्दिर गोरखी, और स्नातक डीएवी (DAV) कॉलेज कानपुर से अर्थशास्त्र में किया. काव्य- साहित्य, दर्शन, प्रश्नोत्तरी, वाद-विवाद प्रतियोगिता और राजनीति की बारीकियों को करीने से समझने में गहरी रूचि रखना अटल जी का पसन्ददीदा शौक था.

इसके अलावा उन्होने अपने छात्र जीवन के दौरान सन् 1939 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ में भी अहम भूमिका निभाई. अटल बिहारी राइट विंग के नेता माने जाते थे. लेकिन उन्होने हमेशा पार्टी लाइन की विचाधारा से ऊपर उठकर काम किया. शायद इसलिये उनके बारे में कहा जाता गया अ राइट मैन इन दा रॉग पार्टी. यानि एक सही आदमी जो गलत पार्टी में है.

एक बार उनसे एक पत्रकार ने सवाल किया कि आपके बारे में कहा जाता है कि आप सही आदमी हैं लेकिन एक गलत पार्टी में हैं. क्या कहना है? इस सवाल पर अटल जी ने एक लम्बी सांस खींचते हुए कहा कि अगर मैं सही आदमी हूं, तो गलत पार्टी में कैसे हो सकता हूं. और पार्टी कैसे गलत हो सकती है. जब फल सही है तो पेड़ गलत कैसे हो सकता है. आखिर बबूल के पेड़ में आम का फल कैसे लग सकता है.

अटल जी का राजनीतिक कारवां

  • सन 1942 में बाजपेयी जी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरूवात की. इस दौरान भारत छोड़ो मोमेंट बहुत तेजी से चल रहा था. इस आन्दोलन में सक्रिय रहे अटल जी के भाई को गिरफ्तार कर लिया गया. जिन्हें तेईस दिनों तक जेल में रखने के बाद रिहा कर दिया गया. इस दरम्यान इनकी मुलाकात श्यामा प्रसाद मुखर्जी से हुई. श्यामा प्रसाद के आग्रह पर अटल जी ने भारतीय जनसंघ को ज्वाइन कर लिया.
  • साल 1951 में भारतीय जनसंघ पार्टी का गठन हुआ. साल 1957 में जनसंघ ने अटलबिहारी बाजपेयी को यूपी की बलरामपुर लोकसभा सीट पर अपना उम्मीदवार घोषित किया. बलरामपुर लोकसभा सीट से अटल जी ने अपनी पहली जीत दर्ज की. इसके बाद उनके राजनीतिक कौशल को देखते हुए उन्हें पार्टी अध्यक्ष बनाया गया
  • दो साल 1977 से 1979 तक मोरार जी देसाई की सरकार में अटल जी विदेशमंत्री रहे. इस दौरान भारत की विदेशो में खास पृष्ठभूमि तैयार हुई.     

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