New Delhi : नई दिल्ली

नई दिल्ली, देश के गृह मंत्री अमित शाह ( Home Minister Amit Shah ) ने अपने आवास पर नागालैंड ( Nagaland )  में  AFSPA कानून के विरोध की मौजूदा हालात को देखते हुए एक मीटिंग की, 23 दिसंबर को होने वाली इस मीटिंग में नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफियू रियो ( Neiphiu Rio ) और हिमंत बिस्मा सरमा ( Himanta biswa sarma ) मोजूद रहे । जिसके बाद कुछ अहम फैसले लिए गए।

इसमें AFSPA ( सशस्त्र बल (विशेष) अधिकार अधिनियम ) कानून सबसे जरूरी था । जिसे लागू रखना चाहिए या नहीं उसकी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 7 सदस्य कमेटी को गठित किया गया, जिसके बाद ये फैसला लिया कि AFSPA कानून अभी 6 महीने और रहेगा तब तक कमेटी अपनी पूरी रिपोर्ट तैयार करेगी।

4 दिसंबर की घटना सबसे अहम

अमित शाह के साथ होने वाली मीटिंग में सेना द्वारा 4 दिसंबर को मारे गए 14 निर्दोष लोगों की मौत पर चर्चा हुई जिसके बाद पूरे नागालैंड में धरने प्रदर्शन हो रहे हैं यहां तक कि कुछ जगह प्रदर्शन के दौरान भीड़ उग्र भी हो गई थी
जनगणना आयुक्त , जनरल विवेक जोशी करेंगे अगुवाई

AFSPA कानून को खत्म करने की मांग

नागालैंड में AFSPA कानून को वापस लेने के लिए पूरे राज्य में धरने प्रदर्शन हो रहे है, हाल ही में राजधानी कोहिमा समेत अन्य जिलों में विरोध प्रदर्शन हुए. जिसमे भारत सरकार द्वारा लगाए गए AFSPA कानून को खत्म करने की मांग की जा रही है. जिसके चलते भारत के जनगणना आयुक्त और रजिस्ट्रार जनरल विवेक जोशी को 7 सदस्यीय कमेटी की कमान दी है, साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से पीयूष गोयल ( अतिरिक्त सचिव ) समिति के सदस्य सचिव भी होंगे.

क्या है AFSPA कानून में सैनिकों को विशेषाधिकार

भारत में AFSPA ( सशस्त्र बल (विशेष) अधिकार अधिनियम ) कानून के तहत सैनिकों को कुछ विशेषाधिकार दे दिए गए हैं जिसमे- राज्य में गोली चलाने के लिए किसी भी आदेश का इंतजार नहीं करना, बिना वॉरेंट के किसी को भी गिरफ्तार करना साथ ही साथ संदिग्ध व्यक्ति के घर में घुसकर जांच पड़ताल करना, अगर संदिग्घ नहीं सुनता है तो पहले चेतावनी दी जाती है लेकिन वो नहीं मानता, तो उस पर गोली चलाने का पूरा अधिकार प्राप्त है.

यही अगर गोली चलने के उपरांत किसी की मौत हो जाती है तो उक्त सैनिकों पर हत्या का कोई मुकदमा नहीं चलाया जाएगा. वहीं सवाल ये उठता है कि, अगर ये अधिकार प्राप्त है तो 4 दिसंबर कि घटना पर सैनिकों पर केस दर्ज क्यों किया गया। हालांकि अगर प्रदेश की सरकार या वहां का पुलिस प्रशासन किसी भी सैन्य टुकड़ी के खिलाफ FIR दर्ज करता है तो मौजूदा समय में कोर्ट के अंदर उसके अभियोग के लिए भारत सरकार का आदेश होना जरूरी होता है।

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