नई दिल्ली: लोकसभा से पास होने के बाद तीन तलाक बिल अब राज्यसभा में फंस गया है. राज्यसभा में हंगामे के बीच इस बिल पर बहस ही नहीं हो सकी और शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दी गई. शुक्रवार को शीतकालीन सत्र का आखिरी दिन है. अब इस बिल का क्या होगा ये एक बड़ा सवाल बन गया है. क्या बिल में वाकई खामियां हैं जैसा कि कांग्रेस और विपक्ष का आरोप है. या फिर ये बिल को टालने का बहाना भर है? सबसे अहम सवाल ये है कि मुस्लिम महिलाएं क्या चाहती हैं? सबसे पहले जान लीजिए तीन तलाक बिल पर राज्यसभा में क्या हुआ.

लोकसभा में बड़े आराम से पास हुआ तीन तलाक बिल राज्य सभा में दूसरे दिन भी पास नहीं हो सका. सरकार बहस के बाद इसे पास कराना चाहती थी. जबकि पूरा विपक्ष एकजुट होकर इसे सेलेक्ट कमेटी में भेजने पर अड़ा था. सरकार जहां कांग्रेस को बिल के खिलाफ बता रही थी वहीं कांग्रेस दावा कर रही थी कि वो बिल के कुछ प्रावधानों के खिलाफ है. वहीं सदन के नेता अरुण जेटली ने कहा कि सेलेक्ट कमेटी में भेजने का प्रस्ताव पहले क्यों नहीं आया? वहीं, सरकार कांग्रेस के दोहरे रवैया पर सवाल खड़ा कर रही है.

सरकार का आरोप है कि अगर बिल में खामियां हैं तो कांग्रेस ने लोकसभा में संशोधन लाने की बजाए उसका जस का तस उसका समर्थन कैसे कर दिया? और अब राज्यसभा में जहां सरकार का बहुमत नहीं है वहां उसने अड़ंगा क्यों डाल दिया? जेटली ने विपक्ष की मांग को अनुचित बताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक संबंधी फैसले के मद्देनजर छह महीने के भीतर कानून बनाना जरूरी है. 22 फरवरी को छह माह की अवधि पूरी हो रही है. इसीलिए यह विधेयक तत्काल पारित होना चाहिए. प्रवर समिति में भेजने की विपक्ष की रणनीति इसे लटकाने का प्रयास है.

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