नई दिल्ली: पिछले 20 दिनों में मोदी सरकार ने मुसलमानों से जुड़े तीन ऐसे फैसले लिए हैं जिसका मुस्लिम समाज पर बड़ा असर पड़ा है. तीन तलाक के बाद आज हज सब्सिडी पर भी मोदी सरकार ने ताला लगा दिया. इस साल एक लाख 75 हजार हज यात्री बिना सब्सिडी के हज यात्रा करेंगे. वहीं सरकारी खजाने में 750 करोड़ रुपए की बचत होगी. लेकिन सरकार का कहना है कि इससे मुसलमानों की ही भलाई होगी और वो इससे महिलाओं का सम्मान बचा रही है. वहीं हज सब्सिडी खत्म करने पर राजनीति घमासान शुरू हो गया है.

दरअसल, साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को हज सब्सिडी खत्म करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि हज सब्सिडी को साल 2022 तक पूरी तरह से खत्म कर दिया जाना चाहिए और जो पैसा बचे उसका इस्तेमाल अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए किया जाए. उस समय केन्द्र की यूपीए सरकार ने इस पर कोई कदम नहीं उठाया लेकिन मोदी सरकार ने तय समय से पांच साल पहले ही इस पर बड़ा फैसला ले लिया है. कांग्रेस को इस पर ऐतराज नहीं है लेकिन वो इससे बचे पैसों का इस्तेमाल मुसलमानों की भलाई में होते देखना चाहती है. वहीं मुसलमानों का कहना है कि उन्हें अब छूट मिलनी चाहिए कि वो एयर इंडिया की बजाए किसी दूसरी इंटरनेशनल फ्लाइट से जाएं. उनके मुताबिक सब्सिडी का फायदा असल में एयर इंडिया को होता था.

वहीं, असदुद्दीन ओवैसी ने सब्सिडी खत्म किए जाने के बाद कांग्रेस और बीजेपी से कुछ बड़े सवाल किए हैं. ओवैसी ने पूछा – अगर हज सब्सिडी तुष्टिकरण थी तो 2014 में मोदी सरकार ने कुंभ मेले के लिए 1150 करोड़ रुपए क्यों दिए? ओवैसी ने आगे यह भी पूछा कि 2016 में मोदी सरकार ने मध्य प्रदेश सरकार को सिंहस्थ महाकुंभ के लिए 100 करोड़ रुपए क्यों दिए? क्यों योगी सरकार ने काशी मथुरा अयोध्या की तीर्थयात्रा के लिए 800 करोड़ रुपए दिए? मानसरोवर यात्रा पर जाने वालों को डेढ़ लाख रुपए की सब्सिडी क्यों दी जा रही है? कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार चार धाम की यात्रा करने वालों को 20 हजार रुपए क्यों देती है?

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