मुंबई: दलित संगठनों ने आज महाराष्ट्र बंद का एलान किया था. कहा यही गया था कि दलित संगठन शांतिपूर्वक भीमा-कोरेगांव की घटना पर विरोध-प्रदर्शन करेंगे, लेकिन सुबह से ही आंदोलन उग्र होता चला गया.. महाराष्ट्र हिंसा के पीछे किसकी साज़िश है ? क्या ये दलित बनाम हिंदुवादियों की लड़ाई है या फिर दलितों को वोट बैंक बनाए रखने का षड्यंत्र ? इस हिंसा में कौन सेंक रहा है सियासी रोटियां ? कितना घातक हिंदुत्व V/s जातिवाद का ज़हर? आज टुनाइट एट नाइन के स्पेशल एडिशन में हम इसी मुद्दे पर बड़ी बहस करेंगे. जानेंगे के पुणे के एक गांव से उठी हिंसा की चिंगारी 18 शहरों तक क्यों और कैसे फैली ?

दलित संगठन शांतिपूर्वक भीमा-कोरेगांव की घटना पर विरोध-प्रदर्शन के दौऱान मुंबई, पुणे, ठाणे, औरंगाबाद समेत महाराष्ट्र के ज्यादातर शहरों में आंदोलनकारियों ने पथराव, आगजनी और रास्ता जाम किया…. मुंबई में ही बेस्ट की 48 बसों में तोड़-फोड़ की गई. इसके अलावा मुंबई और ठाणे में लोकल ट्रेनों को रोकने की कोशिश की गई. औरंगाबाद में तो पुलिस वालों को भी हिंसक भीड़ ने निशाना बनाया.

वहीं महाराष्ट्र में जातीय हिंसा की आग भड़की थी, तो संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेता आग बबूला थे. लोकसभा और राज्यसभा में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं ने कार्य स्थगन प्रस्ताव पेश किया. विपक्ष चाहता था कि संसद की रूटीन की कार्यवाही रोक कर पहले महाराष्ट्र हिंसा पर चर्चा कराई जाए. लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने आरोप लगाया कि भीमा-कोरेगांव हिंसा के पीछे आरएसएस और बीजेपी की साज़िश है. वहीं जवाब में संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि कांग्रेस हिंसा की आग बुझाने की बजाय भड़का रही है. वीडियो में देखें पूरा शो…

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