लखनऊ: यूपी की राजनीति पिछले तीन दशक से मंदिर-मस्जिद पर केंद्रित रही है और अब इसमें एक नया अध्याय जुड़ गया है. इस पर धर्मगुरुओं और नेताओं को शोर मचाने का बहाना मिल गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में ध्वनि प्रदूषण पर फटकार लगाते हुए योगी सरकार से पूछा है कि धर्मस्थलों और सार्वजनिक जगहों पर बिना इजाज़त लाउडस्पीकर बजाने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई..? हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करने से पहले यूपी सरकार ने सभी जिलों में लाउडस्पीकर की जांच शुरू कर दी है.

यूपी सरकार ने सभी जिलों के डीएम को निर्देश दिया है कि 10 जनवरी तक सभी धर्मस्थलों की पहचान की जाए, जहां बिना मंजूरी के लिए लाउडस्पीकर लगाए गए हैं.. ये चेतावनी भी जारी की गई है कि जो धर्मस्थल लाउडस्पीकर बजाने की परमिशन 15 जनवरी तक नहीं हासिल करेंगे, उनके लाउड स्पीकर 20 जनवरी तक हटा दिए जाएंगे. दरअसल लाउडस्पीकर पर हाईकोर्ट के आदेश पर कार्रवाई शुरू हुई तो अब इस पर सियासी शोर शुरु हो गया है। बीजेपी और यूपी सरकार लाउडस्पीकर्स के खिलाफ कार्रवाई को सही बता रही है तो कांग्रेस को लग रहा है कि योगी सरकार कार्रवाई के नाम पर भेदभाव करेगी.

अवैध लाउडस्पीकरों पर सिर्फ राजनीतिक शोर ही नहीं मचा है. बल्कि इस नई बहस में हिंदू और मुस्लिम धर्म गुरु भी कूद पड़े हैं. द्वारिकापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती कह रहे हैं कि अगर बंद करना है तो पहले मस्जिदों पर लगे लाउडस्पीकर बंद किए जाएं। वहीं मुस्लिम धर्मगुरु योगी सरकार की मंशा पर ही सवाल खड़े कर रहे हैं. दरअसल इलाहाबाद हाईकोर्ट में ध्वनि प्रदूषण को लेकर एक जनहित याचिका दी गई थी जिसपर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यूपी सरकार को फटकार लगाई । हाईकोर्ट ने पूछा है कि धर्मस्थलों और सार्वजनिक जगहों पर बिना परमिशन लिए लाउडस्पीकर बजाने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई..? वीडियो में देखें पूरा शो…

कोर्ट की सख्ती के बाद एक्शन के मूड में योगी सरकार, परमिशन दिखाओ वर्ना मंदिर-मस्जिद से उतारे जाएंगे लाउडस्पीकर

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