नई दिल्ली: गुजरात चुनाव के खत्म होते ही आए तमाम एग्जिट पोल के नतीजों से जहां बीजेपी को बड़ी राहत मिली. लेकिन क्या मोदी को रोकना विपक्ष के लिए मुश्किल हो गया है? और जिस तरह से मोदी आगे बढ रहे हैं उससे क्या उनका कांग्रेस मुक्त भारत का सपना साकार होगा? अब हम इस सिक्के के दूसरे पहलू यानी कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गांधी की बात करेंगे. आज सोनिया गांधी ने कहा कि वो रिटायर हो रही हैं। वहीं, कल राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष का पद संभाल लेंगे. एग्ज़िट पोल के नतीजे उनके हक में नहीं हैं लेकिन गुजरात में उनका जो नया अंदाज़ सामने आया उस पर उन्होंने पूरे देश का ध्यान खींचा है.

बीते 14 सालों में राहुल गांधी की जो इमेज थी उसमें इस चुनाव के दौरान बड़ा बदलाव दिखा. राहुल इतने परिपक्व और जुझारु दिखे कि उन्हें आखिर तक कोई खारिज नहीं कर सका. एक मजबूत योद्दा और सेनापति की भूमिका में राहुल ने पूरे चुनाव के दौरान कांग्रेस को बीजेपी के गढ़ में घुटने नहीं टेकने दिए। उल्टा बीजेपी को इस हद तक मजबूर कर दिया कि खुद पीएम मोदी और अमित शाह को दिन-रात मोर्चा संभालना पड़ा.

कई बार ऐसा नज़र आया कि राहुल एजेंडा सेट कर रहे थे. और बीजेपी उसका जवाब दे रही थी. खास बात ये कि पूरे चुनाव प्रचार के दौरान राहुल में कंसिस्टेंसी दिखी. तमाम सवाल उठने के बाद भी वो मंदिर की यात्रा करते रहे और बीजेपी उन्हें डिगा नहीं सकी. उन्होंने हर बयान सधा हुआ दिया और जनता को ये बताने में कामयाब रहे कि वो सीरियस और डेडीकेटेड है. और सबसे बड़ी बात गुजरात में राहुल ने जातीय समीकरण को साधने की पूरी कोशिश की. अगर गुजरात में उन्हें जीत नहीं भी मिली तो वो बहुत कुछ साबित करने में कामयाब रहे. अब सवाल यही है कि क्या राहुल 2019 के लिए विपक्ष की धुरी बनते दिख रहे हैं?

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