नई दिल्ली. आज लोगों को उनकी आस्था के नाम पर खूब लूटा जा रहा है. पहले आसाराम राम बापू फिर रामरहीम जैसे बाबाओं ने लोगों की आस्था के साथ खिलवाड़ किया और उन्हें खूब लूटा. इसी कड़ी में सुखविंदर कौर यानि राधा मां नजर आ रही है. दरअसल यूपी के संभल आयोजित कल्कि महोत्सव में सुखविंदर कौर जिन्हें लोग राधे मां के नाम से जानते हैं, वहां वो धर्म का चोला पहनकर, अपनी टोली के साथ तरह तरह के स्वांग रच रही हैं. यहां पर तथाकथित विवादित राधे मां के साथ प्रमोद कृष्णम और एच एस रावत जो कि अपने आपको संत बताते हैं. ये प्रमोद कृष्णम काग्रेंस की टिकट पर चुनाव भी लड़ चुके हैं. 
 
राधे मां का ये ड्रामा किसी पटकथा से कम नहीं लगता है. खुद के जयकारे लगवाने वाली राधे मां को देवी बनाना, स्वांग रचना, नाचना, राक्षस वध करना और इस दौरान संतों और उनके समर्थकों का जोर जोर से ताली बजा बजा कर ऐसेृ माहौल बनाना ये सबकुछ किसी ड्रामे से कम प्रतीत नहीं होता. धीरे धीरे राधे मां के यहां जब भक्ति और भावना के ज्वार वाला माहौल तैयार हो गया, फिर चढ़ावे के नाम पर लूट सी होने लगी. बता दें राधे मां को चढ़ावें में लोग नोटों की गड्डी भी देते हैं. ऐसे में ये कितनी आस्था और धर्म की रखवाली करती होंगी इसका अंदाजा आप खुद लगा सकते हैं.
 
एक कार्यक्रम में राधे मां ने ऐसी ऐसी भाव भंगिमाएं दिखाईं कि लोग हैरान रह गए. इस कार्यक्रम के दौरान वो त्रिशूल लेकर मां दुर्गा की तरह स्वांग रच रही थी. दरअसल राधे मां संभल आयोजित कल्कि महोत्सव में पहुंची थी. राधे मां को कार्यक्रम के आयोजक प्रमोद कृष्णम ने मेहमान के तौर पर बुलाया था. कार्यक्रम के मंच पर राधे मां जमकर थिरकीं. इस दौरान उनके भक्त उनपर फूलों का बारिश कर रहे थे. राधे मां ने कल्कि महोत्सव के मंच पर आचार्य प्रमोद कृष्णम और दूसरे संतों को भी झूमने के लिए मजबूर कर दिया. और इस कार्यक्रम में आस्था के चढ़ावे की लूट के लिए बहुत कुछ किया गया, इसलिए इंडिया न्यूड इसे भक्ति का भ्रष्टाचार करार दिया. ऐसे में कई सवाल उठते हैं कि चढ़ावा लूटने के लिए राधे मां की नई नौटंकी है? या फिर राधे मां ने धार्मिक आयोजन को लूट का जरिया बनाया?. विवादों में घिरी रहने वाली राधे मां ने इस बार पत्रकारों को खुलेआम धमकी तक दी है. 
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