नई दिल्ली: साध्वी से रेप के दोषी राम रहीम को आज सीबीआई कोर्ट ने 20 साल कैद की सज़ा सुनाई है. दोनों मामलों में 10-10 साल कैद की सज़ा सुनाई गई है. इसके साथ ही, दोनों केस में राम रहीम पर 15-15 लाख का जुर्माना लगाया है. 
 
साध्वी रेप केस में गुरमीत राम रहीम को 20 साल की सज़ा सुनाई गई है. दो रेप मामलों में राम रहीम को 10-10 साल की सज़ा सुनाई गई है. जज ने ये भी आदेश दिया है कि एक सज़ा खत्म होने के बाद दूसरी सज़ा शुरु होगी. इसके अलावा राम रहीम पर 15-15 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है जिसमें से कोर्ट के आदेश के अनुसार दोनों पीड़िता को 14-14 लाख रुपए दिए जाएंगे.
 
 
राम रहीम को सज़ा धारा 376, 511 और 506 के तहत सुनाई गई है. सज़ा राम रहीम पर धारा 376 रेप के लिए लगी जबकि 511 रेप करने की कोशिश और धारा 506 जान से मारने की धमकी के लिए लगी. गुरमीत राम रहीम को आखिरकार अपने किए की सज़ा मिल गई. सत्ता, शासन और कानून को अपनी जेब में समझने वाला राम रहीम अब सलाखों के पीछे है.
 
5 करोड़ समर्थकों के दम पर दुनिया के सामने अपनी हेकड़ी दिखाने वाला राम रहीम रोहतक की जेल में जज के सामने गिड़गिड़ा रहा था. राम रहीम ने जज के सामने फैसला सुनाए जाने से पहले रहम की मांग की जब राम रहीम पर सुनवाई हो रही थी, वकील दलील दे रहे थे तब वो रोने रो रहा था. समाजसेवा के कामों की दुहाई देकर उसने सज़ा कम करने की गुहार भी लगाई. 
 
 
सजा सुनाए जाने के बीच राम रहीम रोते रोते कह रहा था कि मुझे माफ कर दीजिए. सज़ा सुनाए जाने के बाद कोर्ट में बैठकर रो रहा था राम रहीम. जज के सामने दया की दुहाई कर रहा राम रहीम एक समय दुनिया के सामने ताल ठोंक कर खुद को बेगुनाह बताता था.
 
राम रहीम को साध्वी रेप केस में 20 साल जेल की सज़ा निचली अदालत ने सुनाई है और राम रहीम इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील कर सकता है. राम रहीम अब 2037 तक जेल में ही रहेगा. राम रहीम पर हत्या के दो मामले चल रहे हैं. पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड भी राम रहीम के गले की फांस बना हुआ है. इसमें भी राम रहीम को कड़ी सज़ा मिल सकती है. 24 सितंबर 2002 को इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश हुए.
 
 
आदेश के ठीक एक महीने बाद यानि 24 अक्टूबर 2002 को कथित तौर पर डेरा के अनुयायियों ने रामचंद्र छत्रपति को उनके घर पर ही गोली मारकर हत्या कर दी. पुलिस की रिपोर्ट में राम रहीम का नाम तक शामिल नहीं था. फिर रामचंद्र् छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति और मामले के इकलौते चश्मदीद ने इसको लेकर जनवरी 2003 में हाईकोर्ट में सीबीआई जांच की याचिका दी.

 
नवंबर 2003 में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश के बाद CBI जांच हुई. डेरे ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थीं जिसको खारिज कर दिया गया. जांच के बाद CBI ने राम रहीम और उसके गुर्गों को छत्रपति की हत्या का आरोपी बनाया. 2007 में सीबीआई ने डेरा प्रमुख राम रहीम के खिलाफ चार्जशीट दायर की. नवंबर 2014 तक सभी सभी साक्ष्य पेश किए गए. मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2017 को होगी. मामले में फाइनल बहस लगभग पूरी हो चुकी है.
 
 
हत्या का दूसरा मामला अब आपको बताते हैं जिसमें राम रहीम पर डेरा के पूर्व प्रबंधक रंजीत सिंह की हत्या कराने का केस चल रहा है. कहा जाता है कि रंजीत सिंह की हत्या इसीलिए करवाई गई क्योंकि वो राम रहीम के बहुत से राज़ भी जानता था. इसके अलावा राम रहीम को शक था कि रंजीत सिंह ने ही साध्वी रेप केस में पूरे इलाके में चिट्ठी बंटवाई थी.

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