नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक पर मंगलवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया. पांच जजों की बेंच ने 3-2 के बहुमत से इसे खत्म कर दिया. दो जजों ने सरकार से कहा कि वो कानून बनाए. 
 
शायरा बानो, आफरीन रहमान, गुलशन परवीन, इशरत जहां और अतिया साबरी, ये वो 5 महिलाएं हैं जिनकी जिंदगी ट्रिपल तलाक ने तबाह की और अपने साथ हुई नाइंसाफी को लेकर ये सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचीं. ऐसी लाखों महिलाओं की एक बड़ी जीत हुई जब सुप्रीम कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया. 
 
बहुत पहले से ही माना जा रहा था कि समान नागरिक संहिता की राह में तीन तलाक मोदी सरकार का पहला कदम है. तीन तलाक पर फैसले के बाद अगला कदम बढ़ाने की बातें शुरु हो गई हैं. वहीं, इसका विरोध भी होने लगा है.
 
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?
देश के हर नागरिक के लिए एक समान कानून. शादी, तलाक और जमीन जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून. फिलहाल हर धर्म के लोग इन मामलों का निपटारा अपने पर्सनल लॉ के तहत करते हैं, यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू हो जाए तो सभी धर्मों के लिए एक जैसा कानून होगा. शादी, तलाक, गोद लेना और जायदाद के बंटवारे में किसी भी धर्म के लिए समान कानून.

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