नई दिल्ली: 16 जून से शुरु हुए, डोकलाम विवाद को एक महीने से ज्यादा का वक्त बीत गया. इस बीते वक्त में चीन ने भारत को डराने और धमकाने की दर्जनों कोशिशे कर ली लेकिन उसमें वो कामयाब नहीं हो पाया. उल्टे चीन को इस मुद्दे पर मुंह की खानी पडी. चीन अपनी ताकत दिखाता रहा और भारत बिना किसी शोर शराबे के अपनी ताकत बढाता रहा है. 
 
भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जो चीन को करारा जवाब दिया वो उसी ताकत का सबूत है. तिब्बत में चीन जिस ताकत को दिखाकर भारत को डराने की कोशिश कर रहा है. वो ताकत चीन की गीदड़भभकी से ज्यादा कुछ नहीं है.1962 के हिन्दुस्तान को 2017 में पानी पिला देने का ख्वाब देखने वाला चीन अब भारत का कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा क्योकि भारत ने इन बीते कुछ सालों में ना सिर्फ अपनी ताकत को बढाया है बल्कि कूटनीति तौर पर उसने जिन देशों का समर्थन हासिल किया है. वो चीन क्या चीन को समर्थन देने वालों को नाकों चने चबवाने की ताकत रखता है.
 
 
पूरी दुनिया देख रही है और चीन भी देख रहा है कि कैसे अमेरिका और भारत के बीच संबधों में मजबूती आई है. अमेरिका ने हर मोर्चे पर भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का वादा किया है. ना सिर्फ वादा बल्कि बीते कुछ दिनों में जबसे चीन ने डोकलाम में भारत को आंखे दिखाई है. उसके बाद तो अमेरिका ने खुलेआम चीन को चेतावनी दे दी है कि अगर भारत के खिलाफ चीन ने एक कदम भी आगे बढाया तो चीन को पहले अमेरिका की ताकत से सामना करना पडेगा और चीन भी जानता है कि अमेरिका के सामने वो कितना बौना है. 
 
 
दक्षिण चीन सागर में चीन की दादागिरी को अमेरिका ऐसे ही गुस्से में है और चीन ने ऐसा कुछ भी किया तो डोकलाम के बहाने ही सही चीन को अमेरिका से दो- दो हाथ करना पडेगा. मालाबार युद्दाभ्यास में अमेरिका के साथ जापान ने भी भारत के समंदर में अपनी ताकत दिखाई है. ये चीन को अमेरिका के साथ जापान की भी चेतावनी थी कि अगर हिन्द महासागर में चीन ने भारत के खिलाफ थोड़ी भी गडबड़ की जापान अपनी ताकत को भारत के साथ खड़ा करेगा और चीन को करारा जवाब देगा.
 
 
अमेरिका और जापान ही नहीं दक्षिण पूर्व के उन तमाम देशों का भारत को समर्थन हासिल है. जो दक्षिण चीन सागर पर चीन की दादागिरी से परेशान है. इसके अलावा यूके, फ्रांस, जर्मनी, मेक्सिको, सिंगापुर, अफगानिस्तान और इजरायल जैसे ताकतवर देश का भी भारत को चीन के खिलाफ सपोर्ट मिल रहा है. जाहिर है ये चीन के खिलाफ भारत की बड़ी जीत है.
 
हाल ही में भारत के दौरे पर आई आस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री जूली बिशॉप ने हिंद महासागर में भारत को निर्विवाद तौर पर लीडर कह कर अपनी मंशा साफ कर दी है. आस्ट्रेलिया ने प्रशांत क्षेत्र के अहम लोकतांत्रिक देशों भारत, इंडोनेशिया, जापान और आस्ट्रेलिया को एक साथ मिलकर काम करने और दुश्मनों को जवाब देने का आह्वान किया. 
 
दरअसल दक्षिण चीन सागर पर कब्जा करने के लिए चीन ने दक्षिण पूर्वी देशों से दुश्मनी मोल ले रखी है. यही वजह है कि आठ दक्षिण-पूर्वी देशों दक्षिण कोरिया, फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई, इंडोनेशिया और ताइवान ने चीन के खिलाफ हाथ मिलाया है. जिसमें जापान भी शामिल है.
 
भारत चीन को कह चुके है कि वो 1962 का भारत समझने की भूल ना करे. 2017 के भारत के पास अपनी ताकत के साथ दुनिया के तमाम देशों का समर्थन है. ऐसे में 20 जुलाई को संसद में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के बयान पर चीन तिलमिला गया है और उसके जवाब में उसने आज क्या कहा है. 
 
 
सुषमा स्वराज के बयान पर चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने अपने एडिटोरियल में अपनी बौखलाहट साफ बयां कर दी है. अखबार ने कहा कि भारत की महिला विदेश मंत्री ने भारत के सांसदों के सामने झूठ बोला क्योंकि सबसे पहले तो भारत चीन की सीमा में घुस गया है और ये भी तथ्य है कि भारत के इस एडवेंचर से पूरा विश्व समुदाय हैरान है इसलिए कोई भी देश उसका समर्थन नहीं करेगा. दूसरी बात ये है कि भारत की सैन्य ताकत चीन से काफी कम है और अगर मामला सेना के माध्यम से हल तक पहुंचता है तो कोई शक नहीं कि भारत हार जाएगा. 
 
इस चीनी अखबार के इस लेख में चीन की बौखलाहट और डर दोनों साफ साफ दिख रहा है. पूरा विश्व डोकलाम मामले पर भारत के साथ खड़ा है और ये बात चीन अच्छी तरह जानता है लेकिन अपने लोगों के सामने इज्जत बचाना और वर्ल्ड कम्यूनिटी को ये जवाब देना उसकी मजबूरी बन गया है.
 
 
डोकलाम विवाद में अब पाकिस्तान ने टांग अड़ाने की कोशिश की है. पाकिस्तानी उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने चीन और भूटान के उच्चायुक्त से मुलाकात की है. दरअसल ऐसा करके पाकिस्तान ये जताना चाहता है कि वो चीन के साथ है. लेकिन सच्चाई ये है कि दोस्तों के नाम पर चीन की झोली खाली है और जो इक्का दुक्का दोस्त है वो दुश्मन से कम नही. जिनमें एक पाकिस्तान है और दूसरा है तानाशाह किम जोंग का देश उत्तर कोरिया.
 
(वीडियो में देखें पूरा शो)

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