नई दिल्ली: 70 साल में पहली बार भारत का कोई प्रधानमंत्री इजराइल के दौरे पर जा रहा है. 4 जुलाई से 6 जुलाई तक का ये दौरा वर्तमान में चीन और भारत के बीच सीमा पर बिगड़े हुए हालात के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है.
 
इजरायल भारत का तीसरा सबसे बड़ा हथियार सप्लायर देश है और इजरायल के पास जो तकनीक है. वो लाजवाब है ऐसे में भारत की ताकत को इजरायल की तकनीक का साथ मिल जाएंगा तो फिर भारत के सामने कितना भी बड़ा दुश्मन क्यों ना हो वो उसे मुहतोड़ जवाब देने की हालत में होंगा.
 
चीन और भारत के इस समय जो हालात हैं, उससे आगे क्या होगा कुछ नहीं कहा जा सकता क्योकि चीन जिस तरह से अपनी सिमाओं पर घुसपैठ कर रहा है और दादागिरी दिखा रहा है उससे सकेंत ठीक नहीं है. कहा ये भी जा रहा है कि 2022 से पहले चीन एक बार भारत से दो-दो हाथ करना चाहता है. ताकि चीन पूरे साउथ एशिया में अपनी धमक को मजबूती से स्थापित कर सके.
 
 
भारत को लेकर चीन ने 1962 वाली गलतफहमी अगर पाल रखी है तो उसे इस गलतफहमी से बाहर आना चाहिए. देश के रक्षामंत्री भी कह चुके है कि 1962 वाले भारत और 2017 वाले भारतमें काफी अंतर है. सिक्किम में चीन जिस तरह से भारत की तरफ आंखे तरेर रहा है उससे उसकी मंशा पर सवाल उठ रहे है.
 
भारत और रुस ने अपनी भूमिकाएं तय कर ली है. ऐसे में इजरायल एक ऐसा देश है जो चीन के सामने भारत की दीवार बनकर खड़ा रहने की ताकत रखता है. चौथी बड़ी ताकत के तौर पर भारत की सेना सीना ताने दुनिया के सामने खड़ी है. हिंदुस्तान की सेना मजबूती इसके सैनिकों से है. 
 
इंडियन आर्मी में करीब 35 लाख सैनिक हैं, जिनमें लगभग 13 लाख सक्रिय सैनिक है भारत की. कुल 2086 एयरक्राफ्ट है, हमारे पास 6464 टैंक हैं, 19 अटेक हेलिकॉप्टर हैं, 680 फाइटर एयरक्राफ्ट हैं, 857 ट्रांसपोर्ट एयरक्रोफ्ट हैं.
 
 
बेशक चीन की तुलना में हमारी सैन्य ताकत एक पायदान पीछे है लेकिन भविष्य में लड़ाईया अकेले नहीं लड़ी जाएंगी. ये दुनिया जानती है इसीलिए महत्वपूर्ण ये है कि आपके साथ कौन है. अमेरिका से भारत के रिश्तों को दुनिया देख ही रही है. दुनिया का सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका का भारत के साथ खड़ा होना ही काफी है.
 
खबर है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू प्रोटोकाल तोड़कर मोदी के स्वागत में एयरपोर्ट पर मौजूद रहेंगे. दो दिन के कार्यक्रम में मोदी के साथ नेतन्याहू हर जगह मौजूद रहेंगे. मोदी की ये यात्रा दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा देने वाली साबित होगी. 
 
इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने मोदी की इस यात्रा पर कहा है कि भारतीय पीएम की ये एतिहासिक यात्रा है, 70 साल में अभी तक भारत का कोई पीएम इजरायल नहीं आया है. इस यात्रा से दोनों देशों के सैन्य, आर्थिक और कूटनीति रिश्ते मजबूत होंगे. दोनों देशों के संबंध नई उंचाई पर पंहुंचेंगे.
 
 
इजरायल भारत के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है. अपनी ताकत और तकनीक के लिए पूरी दुनिया में जाना जाने वाला इजराइल-भारत के सोने पर सुहागा जैसे है. दुनिया में चौथे नंबर की वायुसेना ऱखने वाला इजरायल दुनिया में उन 9 देशों में शामिल है, जिसके पास अपना सेटेलाइट सिस्टम है. जिसके इस्तेमाल से वो ड्रोन चलाता है. 
 
इजरायल दुनिया का इकलौता ऐसा देश है, जिसकी एंटी बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लैस है. इतने छोटे देश की इतनी ताकत के पीछे है उसकी तकनीक यही वजह है कि रक्षा सौदो में मोदी ने अमेरिका और रुस से ज्यादा इजरायल को तरजीह दी है.
 
(वीडियो में देखें पूरा शो)

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