नई दिल्ली. आज से अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में बेहद अहम सुनवाई शुरु हुई. अगले एक घंटे में हम आपको बताएंगे अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट में आज क्या हुआ? आगे क्या होने वाला है? बाबरी विध्वंस को करीब 25 साल हो चुके हैं. इस लंबे वक्त में देश में दो पीढ़ी ऐसी तैयार हुई है जो अयोध्या मामले के बारे में ज्यादा नहीं जानती. इंडिया न्यूज के शो में अयोध्या के इतिहास और विवाद के हर पहलू आपको बताएंगे. लेकिन सबसे पहले बात आज की सुनवाई के बाद तेज हुई सिसायत की करते हैं. आज की सुनवाई में सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील और कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने सुनवाई को जुलाई 2019 तक टालने की अपील करके सबको हैरान कर दिया. सिब्बल चाहते थे कि सुनवाई तब तक न हो जब तक 2019 के आम चुनाव न हो जाएं. सिब्बल की इस दलील को लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने राहुल गांधी पर सवाल खड़ा कर दिया. अमित शाह ने कहा – बीजेपी चाहती है कि सुनवाई जल्द पूरी हो और अयोध्या में भव्य मंदिर का निर्माण हो. क्या गुजरात में मंदिर-मंदिर घूम रहे राहुल राम मंदिर का निर्माण टालना चाहते हैं?

मंगलवार सुबह से ही बीजेपी कपिल सिब्बल पर निशाना साध रही थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट में मुस्लिमों का पक्ष रखने के दौरान सिब्बल ने जैसे ही सुनवाई टालने की अपील की वैसे ही बीजेपी को एक बड़ा मुद्दा मिल गया. अपने हमले को धारदार बनाने के लिए अमित शाह ने कपिल सिब्बल को तीन मुद्दों से जोड़ा जिन्हें वो कांग्रेस की तरफ से लेकर आए थे. अमित शाह ने कहा – सिब्बल ही 2G घोटाले के बाद जीरो लॉस की थ्योरी लेकर आए थे. गुजरात में 50 फीसदी से ज्यादा आरक्षण का फॉर्मूला भी सिब्बल ही लेकर आए थे. और अब राम मंदिर के रास्ते में रोड़े अटकाने के लिए भी कांग्रेस ने कपिल सिब्बल को ही आगे किया है.

गुजरात चुनावों में हिंदू वोट इतने अहम हैं कि कांग्रेस ने अमित शाह के हमले का जवाब देने में ज़रा भी देरी नहीं की. कांग्रेस की तरफ से जवाब देने आए रणदीप सुरजेवाला ने साफ किया कि कपिल सिब्बल की वकालत का कांग्रेस की सियासत से कोई लेना-देना नहीं है. इसके साथ ही सुरेजावाला ने भोपाल गैस त्रासदी की याद दिलाई और कहा कि डाउ केमिकल कंपनी के वकील अरुण जेटली थे. क्या बीजेपी उनके खिलाफ कार्रवाई करेगी? इन सभी सवालों और पूरे मामले को समझने के लिए वीडियो देखें.

विवादित ढांचे के विध्वंस की आज 25वीं बरसी, केंद्र ने राज्यों को जारी किया अलर्ट

अयोध्या जमीन विवाद बना संवैधानिक संकट! सुप्रीम कोर्ट सुनेगा दोनों पक्षों की दलीलें