नई दिल्ली. सोनिया गांधी के नेतृत्व में भूमि अधिग्रहण विधेयक के खिलाफ 11 दलों के एक साथ आज सड़क पर उतरने के बाद भूमि अधिग्रहण बिल का पास होना फिर खतरे में पड़ गया है. सोनिया के नेतृत्व में आज विभिन्न दलों के लगभग 200 सांसदों ने संसद से राष्ट्रपति भवन तक पैदल मार्च किया. सोनिया गांधी ने पैदल मार्च के लिए संसद से निकलने के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि किसानों के हित में वे विपक्ष के साथ सड़क पर उतरी हैं और कांग्रेस को उम्मीद है कि राष्ट्रपति उनकी बात सुनेंगे.

इस प्रदर्शन में कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद, राजीव शुक्ला, कमलनाथ, अंबिका सोनी, राज बब्बर आदि शामिल रहे. जबकि जदयू अध्यक्ष शरद यादव, सपा के नरेश अग्रवाल, राजद के सांसद भी इस प्रदर्शन में मौजूद रहे. राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि हम 14 दलों के नेता आज भूमि अधिग्रहण विधेयक के विरोध में राष्ट्रपति से मिले. इन दलों में कांग्रेस के अलावा जदयू, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, सीपीआइएम, डीएमके, सीपीआइ, राजद, आइएनएलडी सहित अन्य पार्टियां शामिल हैं. सोनिया ने कहा कि हमने राष्ट्रपति को एक मेमोरेंडम देकर उनसे भूमि अधिग्रहण विधेयक के मुद्दे पर हस्तक्षेप करने की मांग की है. उन्होंने कहा कि यह बिल किसान विरोधी है, जिसमें पारदर्शिता का अभाव है और सामाजिक सद्भाव को बिगाड़ने वाला है. वहीं, जदयू अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि 31 प्रतिशत वोट के साथ बनी नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ हम 69 प्रतिशत लोग खड़े हो गये हैं. उन्होंने कहा कि अब बिखरा विपक्ष एकजुट हो चुका है और हमने आज जो लड़ाई शुरू की है, उसे गांव, खेत, खलिहान व युवाओं तक फैलायेंगे. उन्होंने कहा कि हम अपने किसानों की बदौलत ही खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर हो सके हैं, जबकि किसी दूसरे क्षेत्र में आत्मनिर्भर नहीं हुए हैं. उन्होंने कहा कि यह विधेयक बड़ी खराब चीज है और हम इसके लिए जबतक जरूरत होगी लड़ेंगे.
 
सोनिया गांधी की अगुवाई में होने वाले इस प्रदर्शन में पहले 11 पार्टियां शामिल थी, लेकिन बाद में मायावती की बसपा व शरद पवार की राकपा ने इससे किनारा कर दिला. अब इस मार्च में कांग्रेस के साथ जदयू, तृणमूल कांग्रेस, वाम पार्टियां शामिल हैं. इस पैदल मार्च के लिए कांग्रेस व विभिन्न पार्टियों का विजय चौक के पास जुटान शुरू हो गयी है. कांग्रेस सहित कुछ प्रमुख विपक्षी पार्टियां 2013 वाले भूमि अधिग्रहण कानून को ही लागू कराने की मांग पर अड़ा है, जबकि सरकार इसे नये स्वरूप में लागू कराने की जिद पर अड़ी है. बजट के शीत सत्र के बाद सरकार ने इस संबंध में अध्यादेश भी जारी किया था. 

Leave a Reply

Your email address will not be published.

देश और दुनिया की ताजातरीन खबरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक,गूगल प्लस, ट्विटर पर और डाउनलोड करें Inkhabar Android Hindi News App