नई दिल्ली. देशभर में मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश को लेकर बहस छिड़ी हुई है. लेकिन महाराष्ट्र के शनि शिंगणापुर में इस प्रथा को बदल दिया गया है.  महिलाओं को परंपरा के नाम पर शिंगणापुर में शनिदेव की पूजा से रोका जाता था.
 
महिलाओं ने इसके खिलाफ आवाज़ उठाई और मुंबई हाईकोर्ट ने दखल दिया तो शिंगणापुर की 400 साल पुरानी परंपरा बदल दी गई. तो क्या देश के दूसरे मंदिरों और धर्मस्थलों की परंपराएं नहीं बदली जा सकतीं? ये सवाल अब देश की सबसे बड़ी अदालत में है.
 
केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 साल से अधिक उम्र की महिलाओं के जाने पर पाबंदी है और इस पाबंदी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है.
 
सुप्रीम कोर्ट ने इस बारे में केरल सरकार और सबरीमाला मंदिर के मैनेजमेंट से पूछा है कि क्या किसी को मंदिर जाने से सिर्फ इसलिए रोका जा सकता है कि वो महिला है? ये बहस अब बड़ी हो चुकी है कि मंदिरों की परंपरा बड़ी है या संविधान? क्या धर्मस्थलों में महिलाओं पर पाबंदी के दिन अब लदेंगे.
 
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