नई दिल्ली. बाल अधिकार संरक्षण आयोग, दिल्ली ने कहा है कि पबजी, फोर्टनाइट, ग्रांड थेफ्ट ऑटो, गॉड ऑफ वार, हिटमैन जैसे कई ऑनलाइन वीडियो गेम से बच्चों के दिमाग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. हालांकि आयोग ने इन ऑनलाइन गेम्स पर बैन नहीं लगाया है. मगर बच्चों को इन गेम्स की लत लग रही है और बच्चे आत्महत्या जैसे खतरनाक स्टेप उठाने पर भी नहीं हिचकिचाते हैं.

पबजी जैसे ऑनलाइन गेम को बैन करने के लिए कई बार आवाजें उठती रही हैं. कई अभिभावकों का मानना है कि ऐसे ऑनलाइन गेम्स से बच्चों में हिंसक प्रवृति आ रही है. बच्चे पूरा दिन मोबाइल में घुसे रहते हैं, उन्हें इन गेम्स की लत लग रही है.

इससे पहले गुजरात सरकार ने भी जिला प्रशासन को सर्कुलर जारी कर पबजी जैसे ऑनलाइन गेम्स पर बैन लगाने की बात कही थी. उस दौरान गुजरात के बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने शिक्षा विभाग को इस बारे में सिफारिश की थी.

वहीं इसी बीच एक खबर भी आई थी. महाराष्ट्र के एक 11 साल के छात्र ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर पबजी गेम पर प्रतिबंध लगाने की गुहार लगाई थी. छात्र ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस को पत्र में लिखा था कि पबजी गेम को बैन किया जाए. क्योंकि इस गेम में हिंसा, हत्या, गुस्सा, लूट आदि को बढ़ावा दे रहा है.

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से की गई परीक्षा पे चर्चा-2.0 में पबजी का जिक्र हुआ था. उस दौरान एक विद्यार्थी की मां ने प्रधानमंत्री से पबजी के बारे में पूछा था जिसका पीएम मोदी ने जवाब भी दिया था.

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