Toll Tax Rules: आज के समय में देशभर में एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों का विस्तार काफी तेजी से हो रहा है. हालांकि, पिछले कुछ सालों से सड़कें काफी तेजी से बनी हैं और रोड नेटवर्क काफी बेहतर हो चुका है. लेकिन, अक्सर हाइवे और एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले लोगों के मन में यह सवाल आता है कि कोई भी हाइवे जब बन रहा होता है तो और बनकर जब तैयार हो जाता है तो उसके बाद सड़क की लागत की भरपाई हो जाने के बाद भी टोल टैक्स क्यों वसूली जाता है. आखिर टोल व्यवस्था में ऐसा किए जाने के पीछे क्या वजह है.
हाल ही में NHAI ने इसे लेकर एक जवाब दिया है, जिसमें उन्होंने इसके पीछे की वजह बताई है कि सड़क बन जाने के बाद उसकी लागत वसूले जाने के बाद भी टोल पर ड्राइवरों को टैक्स क्यों देना पड़ता है. चलिए जानते हैं इसके पीछे की वजह के बारे में.
क्यों वसूला जाता है टोल टैक्स?
सड़क बनने के बाद भी टोल टैक्स की वसूली के पीछे कई कारण होते हैं. इस सवाल का जवाब देने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने अपने आधिकारिक प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट जारी की है, जिसमें उन्होंने इस बारे में साफ किया है कि ऐसा क्यों होता है. दरअसल, हाइवे पर लागत वसूल हो जाने के बाद भी टोल इसलिए वसूला जाता है ताकि सड़क का रखरखाव सही तरीके से किया जा सके.
इसके अलवा कई बार पुल समय के साथ डैमेज हो जाते हैं या उनमें किसी तरह की समस्या आ जाती है. उसकी मरम्मत कराने के लिए भी टोल वसूला जाता है. केवल यही नहीं बल्कि, हाइवे बन जाने के बाद उसकी नियमितौर पर मरम्मत करने और रखरखाव के लिए यात्रियों से टोल की वसूली की जाती है.
सुविधाओं के लिए भी वसूला जाता है टोल
टोल वसूलने के पीछे अन्य भी कई कारण और यात्रियों की सुविधाओं को बढ़ाना होता है. नई सड़क और बुनियादी ढांचों की परियोजनाओं के विकास के लिए भी टोल की वसूली की जाती है. सुविधाओं की बात करें तो यात्रियों द्वारा वसूला जाने वाले टोल से 24×7 पेट्रोलिंग और निगरानी की जाती है. वहीं, दूसरी ओर इमरजेंसी के लिए एंबुलेंस और क्रेन जैसी व्यव्स्थाएं भी यात्रियों द्वारा दिए गए टोल से ही दी जाती हैं. NHAI के मुताबिक, टोल टैक्स की वसूली का मकसद यात्रियों को सुरक्षित और एक बेहतरीन सफर देना भी है. वहीं, टोल की राशि से ही स्ट्रीट लाइट और हाइवे पर लगने वाली अन्य जरूरी चीजें लगवाई जाती हैं.