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Electric Vehicle Insurance: पेट्रोल-डीजल कारों की तुलना में महंगा क्यों होता है इलेक्ट्रिक वाहनों का बीमा? खरीदने से पहले जरूर जान लें ये बातें

कई लोग यह मान लेते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहन में इंजन, गियरबॉक्स और कई अन्य पार्ट्स नहीं होते, इसलिए उसका इंश्योरेंस भी सस्ता होना चाहिए. लेकिन, असल में ऐसा नहीं होता है. बीमा कंपनियां प्रीमियम तय करते समय केवल वाहन की कीमत ही नहीं, बल्कि उसके रिपेयर कॉस्ट, बैटरी की कीमत और अन्य चीज भी देखती हैं. इंश्योरेंस खरीदते समय आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए.

By: Kunal Mishra | Published: August 2, 2026 7:14:39 PM IST



Electric Vehicle Insurance: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है. यही कारण है कि पिछले कुछ समय से ईवी कार, बाइक और स्कूटर आदि की बिक्री काफी तेजी से हो रही है. कई लोग इसे पेट्रोल-डीजल से सस्ता विकल्प मानकर चुनते हैं ताकि उनकी डेली रनिंग कॉस्ट कम हो सके और पेट्रोल-डीजल के दाम से होने वाला बोझ कम हो सके. लेकिन, जब लोग इलेक्ट्रिक वाहन को खरीदने जाते हैं तो ऐसे में इंश्योरेंस लेते समय उन्हें यह ज्यादा महंगा लगता है. हालांकि, उसका इंश्योरेंस प्रीमियम कई मामलों में समान पेट्रोल या डीजल गाड़ी की तुलना में ज्यादा हो सकता है.

कई लोग यह मान लेते हैं कि इलेक्ट्रिक वाहन में इंजन, गियरबॉक्स और कई अन्य पार्ट्स नहीं होते, इसलिए उसका इंश्योरेंस भी सस्ता होना चाहिए. लेकिन, असल में ऐसा नहीं होता है. बीमा कंपनियां प्रीमियम तय करते समय केवल वाहन की कीमत ही नहीं, बल्कि उसके रिपेयर कॉस्ट, बैटरी की कीमत और अन्य चीज भी देखती हैं. इंश्योरेंस खरीदते समय आपको कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए. 

महंगी बैटरी 

इलेक्ट्रिक वाहन की सबसे महंगी यूनिट उसकी बैटरी होती है. बैटरी के बिना कोई भी ईवी वाहन बेकार है. कई मॉडलों में बैटरी वाहन की कुल कीमत का बड़ा हिस्सा होती है. अगर बैटरी में पानी, आग या किसी अन्य कारण से बैटरी को नुकसान पहुंचता है, तो उसकी मरम्मत या बदलने का खर्च काफी ज्यादा हो सकता है. सामान्य पेट्रोल-डीजल की गाड़ियों में लगने वाली बैटरी की तुलना में ईवी की बैटरी ज्यादा महंगी होती हैस जिसका असर कहीं न कहीं गाड़ी के प्रीमियम पर भी पड़ता है. 

रिपेयर और सर्विस की लागत 

इलेक्ट्रिक वाहनों के इंश्योरेंस का प्रीमियम इसलिए भी महंगा होता है क्योंकि इलेक्ट्रिक वाहनों की नियमित सर्विसिंग कई मामलों में आसान हो सकती है, लेकिन दुर्घटना के बाद होने वाली मरम्मत हमेशा सस्ती हो, ऐसा जरूरी नहीं होता है. इसलिए कंपनी द्वारा कई बार आपसे ज्यादा प्रीमियम वसूला जाता है.अगर किसी वाहन की मरम्मत का खर्च ज्यादा है, तो उसका इंश्योरेंस प्रीमियम भी ज्यादा हो सकता है. 

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