Car Safety Rating: भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार तेजी से बदल रहा है. पहले के समय में लोग कार में केवल लुक्स और फीचर्स आदि देखते थे. लेकिन, आज के समय में लोगों का नजरिया और सोच बदल चुका है. अब लोग ऐसी कार लेना चाहते हैं, जो फीचर्स और परफॉर्मेंस से लैस होने के साथ ही साथ बिल्ड क्वालिटी में भी बेहतर हो. हालांकि, आपको ऐसी कार लेनी चाहिए, जिसमें सेफ्टी के साथ ही साथ पावर और एक अच्छा इंटीरियर भी हो. इसलिए आपको ऐसी कार लनी चाहिए, जिसमें 5 स्टार सेफ्टी रेटिंग हो. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर यह 5 स्टार सेफ्टी रेटिंग किस आधार पर तय की जाती है.
यह सेफ्टी रेटिंग कारों को कैसे मिलती है. इस लेख में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि आखिर 5 स्टार सेफ्टी रेटिंग मिलती है. चलिए जानते हैं इस बारे में.
कार को कैसे मिलती है 5 स्टार सेफ्टी रेटिंग?
देखा जाए तो कार को 5 स्टार सेफ्टी रेटिंग कई आधारों पर मिलती है. यह इतनी आसान प्रक्रिया नहीं है. इसके लिए कार को कई तरह के टेस्ट और प्रक्रियाओं से होकर गुजरना पड़ता है. सेफ्टी रेटिंग मिलने के लिए कार को अलग-अलग तरह के कई टेस्ट पास करने होते हैं, जिसके बाद कार की बिल्ड क्वालिटी के बाद सेफ्टी रेटिंग तय की जाती है. आमतौर पर सबसे पहले और जरूरी क्रैश टेस्ट, साइड क्रैश टेस्ट और पोल इम्पैक्ट टेस्ट किए जाते हैं. यह सभी टेस्ट होने के बाद भी कार को कई तरह की प्रक्रियाओं से होकर गुजरना पड़ता है. दरअसल, इनटेस्ट में कार को स्पीड में चलाकर उसमें एक डमी बैठाया जाता है, जिसके बाद यह क्रैश टेस्ट पूरा होता है.
कौन तय करता है 5 स्टार सेफ्टी रेटिंग?
दुनिया में ऐसी बहुत सी कंपनियां और एजेंसियां हैं, जो क्रैश टेस्ट के बाद कारों को सेफ्टी रेटिंग देने का काम करती हैं. Global NCAP, Euro NCAP, ASEAN NCAP आदि जैसी बाहरी एजेंसियां हैं, जो कार को सेफ्टी रेटिंग देती हैं. वहीं, भारत में कार निर्माता कंपनियों को Bharat NCAP द्वारा सेफ्टी रेटिंग दी जाती है. हालांकि, देखा जाएतो यह सेफ्टी रेटिंग कार की बिल्ड क्वालिटी के आधार पर तय की जाती है.