नई दिल्ली. नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा एक आदेश पारित किए जाने के बाद अब राज्य में अग्रिम जमानत मिलने का रास्ता साफ हो गया है. उत्तराखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य में अब अग्रिम जमानत मिलेगी. राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि किसी मामले में कोई अग्रिम जमानत मांगता है तो कानून के अनुसार उसे जमानत मिलेगी. राज्य सरकार ने कहा कि नैनीताल हाईकोर्ट ने इस बाबत एक आदेश पारित किया है जिसे उत्तराखंड सरकार ने मान लिया है.

दरअसल उत्तर प्रदेश और उतराखंड में अग्रिम जमानत का प्रावधान नहीं था, जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है. अग्रिम जमानत वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने दोनों राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. नैनीताल हाईकोर्ट ने 20 सितंबर को उत्तराखंड में भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 438 को प्रभावी बनाया था. आईएएस पंकज पांडे की याचिका उत्तराखंड राज्य में पहली अग्रिम जमानत याचिका रही. उत्तराखंड में इससे पहले गिरफ्तारी पर रोक की याचिका ही दाखिल हो पाती थी.

नैनीताल हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने विष्णु सहाय की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य में अग्रिम जमानत की व्यवस्था लागू करने का आदेश दिया था. दंड प्रक्रिया संहिता उत्तरप्रदेश संशोधन अधिनियम 1976 को चुनौती देते हुए विष्णु सहाय ने कहा था कि राज्य में अग्रिम जमानत का प्रावधान न होना संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों का उल्लंघन है. इसके बाद नैनीताल हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत का एक आदेश पारित किया था जिसे राज्य सरकार ने मान लिया. 

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