आजमगढ़. सीएम योगी आदित्यनाथ के राज में पत्रकारों पर कानूनी कार्रवाई के मामले बढ़ते जा रहे हैं. उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में स्कूली छात्रों द्वारा स्कूल में झाड़ू लगाते हुए वीडियो बनाने वाले पत्रकार संतोष जायसवाल को गिरफ्तार कर लिया गया है. स्थानीय प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. बता दें कि अभी हाल ही में यूपी के ही मिर्जापुर में मिडडे मील में बच्चों को नमक रोटी परोसने की वीडियो बनाने वाले पत्रकार पर भी एफआईआर दर्ज हुई थी.

संतोष जायसवाल के साथी सुधीर सिंह ने बताया, “पिछले हफ्ते स्कूली बच्चों द्वारा स्कूल में झाड़ू लगाने की वीडियो बनाने के कारण संतोष को गिरफ्तार किया गया है. उसके ऊपर वसूली और सरकारी सेवक को काम में बाधा पहुंचाने के फर्जी मामले दर्ज किए गए हैं.” वहीं आजमगढ़ के जिलाधिकारी एनपी सिंह ने कहा कि पत्रकार के साथ कोई अन्याय नहीं होने दिया जाएगा. हम भरोसा दिलाते हैं कि उनके साथ कोई अन्याय नहीं होगा. हमने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं.

जिलाधिकारी ने बताया कि पत्रकार के फोन करने के बाद पुलिस स्कूल पहुंची और पत्रकार और स्कूल के हेडमास्टर राधे श्याम यादव को थाने ले गई. स्कूल के हेडमास्टर ने पत्रकार के खिलाफ मामला दर्ज कराया है. उन्होंने पुलिस को कहा कि संतोष जायसवाल अक्सर स्कूल आते थे और शिक्षकों के साथ बदतमीजी करते थे और छात्रों पर अपने न्यूजपेपर सब्सक्राइब करने का दबाव बनाते थे.

हेडमास्टर ने आरोप लगाया कि संतोष जायसवाल स्कूल आए और कुछ छात्रों से कहा कि वो स्कूल में झाड़ू लगाएं मैं तस्वीरें लूंगा. इसके बाद मैं स्कूल पहुंचा और आपत्ति जताई तो उन्होंने (संतोष जायसवाल) मुझसे पैसे मांगे. बता दें कि स्थानीय प्रशासन ने इस पूरे मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं.

सरकारी स्कूलों की दयनीय हालत की रिपोर्टिंग बंद कर दें?
देश भर के सरकारी स्कूलों की हालत कमोबेस एक जैसी ही है. लेकिन बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की हालत ज्यादा खराब है. उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों की दयनीय हालत दिखाने वाले एक पत्रकार पर योगी आदित्यनाथ सरकार ने एफआईआर दर्ज करा दिया था. हालांकि उस घटना के बाद मिर्जापुर के उस स्कूल की हालत में सुधार देखने को मिला. अब आजमगढ़ में स्कूली बच्चों से झाड़ू लगाने की वीडियो बनाने वाले पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया गया है.

ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या यूपी में योगी आदित्यनाथ की सरकार में सारे सरकारी स्कूल इतने शानदार हो गए हैं कि उनकी खराब हालत के बारे में की जा रही सारी बातें साजिश और मिथ्या आरोप हैं? इस सवाल का जवाब तलाशने के लिए आप अपने सबसे नजदीकी सरकारी स्कूल जाएं. वहां पर खुद से यह सवाल पूछें कि क्या आप अपने बच्चों को इस स्कूल में पढ़ाना चाहेंगे.

स्कूल के इन्फ्रास्ट्रक्चर और रख रखाव तक ठीक नहीं है. शिक्षक-छात्र का अनुपात सही नहीं है. रही बात पढ़ाई की तो हाल ही में स्कूली शिक्षा पर काम करने वाली प्रथम संस्था ने अपनी सालाना रिपोर्ट ‘असर’ के नाम से निकाली थी जिसमें यह खुलासा हुआ कि आठवीं कक्षा में पढ़ने वाला बच्चा दूसरी कक्षा के स्तर का ज्ञान रखता है. अगर यह सब सच है तो इसकी रिपोर्टिंग करेगा कौन? 

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