नई दिल्ली. तीस हजारी कोर्ट ने उन्नाव रेप केस के दोषी विधायक कुलदीप सेंगर के लिए उम्र कैद की सजा सुनाई है. इसके साथ ही कोर्ट ने कुलदीप सेंगर पर 25 लाख का जुर्माना लगाया है. कुलदीप सेंगर के जेल जाने के बाद अब यह जुर्माना उनके परिवार को देना होगा. शुक्रवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए पीड़िता को न्याय दे दिया है. बीजेपी के पूर्व विधायक को हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोषी ठहराया था.

कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को अपहरण और रेप का दोषी मानते हुए धारा 376 और पॉक्सो के सेक्शन 6 के तहत यह फैसला सुनाया है. इस फैसले को लेकर जज ने शुरुआत में ही आरोपी कुलदीप सेंगर के वकीलों की तरह से दिए गए हलफनामों को पढ़ा था.

ऐसे आया कुलदीप सिंह सेंगर की सजा का फैसला.

तीस हज़ारी कोर्ट में कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ सजा पर बहस शुरू करते ही जज ने पूछा कि कुलदीप सिंह सेंगर कहाँ है. इसके साथ जज ने कहा कि आरोपी को कोर्ट में बुलाया जाए. फिर कुलदीप सिंह सेंगर का चुनावी हलफ़नामा कोर्ट में पेश किया गया और इसके अलावा कुलदीप के राजनीतिक कैरियर को भी कोर्ट के समक्ष रखा गया. जज ने सेंगर के चुनावी हलफनामे को पढ़ा और फिर सेंगर को कोर्ट में पेश किया गया. सुनवाई के दौरान सेंगर के वकील में कहा उनके उपर लोन भी है जो उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई के लिए ली थी.

इसी बीच पीड़ित की तरफ से कहा गया कि वो भी कोर्ट के समक्ष कुछ कहना चाहते हैं. पीड़ित की तरफ से कहा गया कि कुलदीप विधायक है और उन्होंने इस मामले में अपने पद का दुरुपयोग किया है. पीड़ित के वकील ने कहा कि कुलदीप सिंह को अधिकतम सजा देनी चाहिए. पीड़ित ने कहा कि इस मामले में उम्र कैद की सज़ा देनी चाहिए. इसी बीच जज ने कहा उम्र कैद को लेकर सुप्रीम कोर्ट मे एक फैसला है जिसमें मारू राम VS UOI में सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि उम्र कैद का मतलब उम्र कैद है. हालांकि कोर्ट में कहा कि हम रेमिशन के हिस्से में नही जाएंगे।

कुलदीप सिंह सेंगर की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के चार फैसलों का जिक्र किया गया. सेंगर के वकील ने कहा कि जब अपराध हुआ था उस समय अगर कोई एक्ट नही था और बाद में कोई एक्ट बना तो उस केस में नए एक्ट के तहत सजा नही हो सकती. इसी बीच जज ने पीड़ित के वकील धर्मेश मिश्रा को बार बार टोकने पर फटकार लगाई और जज ने कहा आप बदतमीजी न करें. जज ने धर्मेश मिश्रा को कहा अब बहुत हो गया हमनें आपको सुन लिया.

जज ने कहा कि अगर आपको मुआवजे पर बहस करनी है तो आप कर सकते है. इसी बीच सीबीआई ने मुआवजे पर कहा कि कोर्ट को जो उचित लगे वो पीड़ित को मुआवजा दे. इसके बाद कुलदीप सिंह सेंगर की सजा पर तीस हजारी कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा और 2 बजे फैसला आने का समय दिया.

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