मुंबईः नरेंद्र दाभोलकर, कम्युनिस्ट नेता गोविंद पन्सारे, एमएम कलबुर्गी और महिला पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या शामिल होने के आरोपों के बाद जांच एजेंसियों के निशाने पर आई दक्षिणपंथी सनातन संस्था ने सोमवार को सभी आरोपों को खारिज किया और साथी ही भारतीय संविधान से धर्मनिरपेक्ष शब्द को हटाने की मांग की है. सनातन संस्था के प्रवक्ता चेतन राजहंस ने एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान इस आरोपों को सिरे से खारिज किया और कहा कि धर्मनिरपेक्ष और समाजवादी शब्द संविधान में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल के दौरान हिन्दू विरोधी संगठन के दबाव में आकर शामिल करवाए थे. राजहंस ने कहा कि अगर इन शब्दों को संविधान में जोड़ने का प्रावधान है तो इन्ही प्रावधानों को हटाया भी जा सकता है. उनकी इस मांग को केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने सिरे से खारिज कर दिया.

केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने सनातन संस्था पर लगे आरोपों के बाद कहा किस, किसी व्यक्ति को मारकर उसके विचार को नहीं रोका जा सकता. हमें किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करना चाहिए. लेकिन हिंसा में शामिल लोगों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने सोमवार को एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने कहा, लेखकों, विचारकों की हत्या में सनातन संस्था के लोगों के नाम सामने आये हैं और वे पकड़े भी गये हैं। इस संस्था की जांच होनी चाहिए.

सोमवार को सनातन संस्था की प्रेस कांफ्रेंस में उनके प्रवक्ता राजहंस ने कहा, सनातत संस्था और हिंदू जनजागृति समिति इस वक्त जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं लेकिन दोनों में से कोई भी संस्था किसी भी तरह की आतंकी गतिविधि में शामिल नहीं है बल्कि ये दोनों पूर्ण रूप से विशुद्ध धार्मिक संगठन हैं. राजहंस ने कहा हमें पूरी साजिश के तहत बदनाम किया जा रहा. हम बता देना चाहते हैं कि हम किसी भी तरह की हिंसा का समर्थन नहीं करते न ही इसे सही ठहराते हैं पिछले 27 साल से हमारा मिशन सिर्फ धर्म का प्रचार रहा है.

राजहंस ने नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पन्सारे, एमएम कलबुर्गी सहित महिला पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या में सनातन संस्था के शामिल होने के आरोप को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, हमें मिली जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र आतंकवाद रोधी दस्ते (ATS) और सीबीआई ने कुल 9 लोगों को पकड़ा है जिनमें से एक का भी सनातन संस्था के साथ किसी प्रकार का संबंध नहीं है.

बता दें कि सनातन संस्था की इस प्रेस कांफ्रेंस से पहले केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले ने खुले तौर पर सनातन संस्था का विरोध किया था. उन्होंने कहा कि अगर जरूरत हो तो इस संस्था को बैन कर देना चाहिए. उन्होंने कहा, सनातन संस्था को चाहिए कि वह अपनी हिंसक गतिविधियों पर रोक लगाए. अठावले ने कहा, अगर दाभोलकर और गौरी लंकेश की हत्या के पीछे इस सनातन संस्था का हाथ है तो इस संस्था के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा, अपराधी को जल्द से जल्द पकड़ा चाहिए और अगर जरूरी लगे तो इस सनातन संस्था पर बैन लगा देना चाहिए.

केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले ने खुलकर सनातन संस्था का विरोध किया है। सोमवार ( 27 अगस्त) को अठावले ने कहा कि अगर जरूरत हो तो सनातन संस्था को पूरी तरह बैन कर देना चाहिए। सनातन संस्था को अपनी हिंसक गतिविधियों को रोकना चाहिए। रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) के चीफ रामदास अठावले ने कहा, ‘अगर नरेंद्र दाभोलकर और गौरी लंकेश की हत्या के पीछे सनातन संस्था का हाथ है,तो इसके खिलाफ कार्रवाई करने चाहिए। अपराधी को जल्द से जल्द पकड़ना चाहिए। अगर जरूरत हो तो सनातन संस्था को जल्द से जल्द बंद कर देना चाहिए।

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