नई दिल्ली. महाराष्ट्र की सियासत का आखिरी चरण चल रहा है, कहें तो अब बहुत जल्द ही साफ हो जाएगा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री कौन बनेगा. हालांकि कभी भाईचारे की मिसाल पेश करने वाली शिवसेना-बीजेपी को प्रदेश की जनता ने सरकार बनाने के योग्य तो बनाया लेकिन मतभेद के कारण दोनों का गठबंधन टूट गया. इतना ही नहीं शिवसेना ने अपने आप को एनडीए से भी अलग कर लिया है. वहीं केंद्र सरकार में शिवसेना के मंत्री अरविंद सावंत ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस्तीफा दे दिया है, सावंत ने कहा कि बीजेपी ने सेना का विश्वास तोड़ा है इसलिए हम इसके साथ नहीं हैं.

उद्धव ठाकरे होंगे महारष्ट्र के सीएम?

अब बात करें प्रदेश की कमान किसके हाथ में जाएगी तो इसमें उद्धव ठाकरे का नाम पहले आता है. शिवसेना के पास इस समय 56 विधायक हैं जो प्रदेश में दूसरी बड़ी पार्टी है. सेना प्रदेश में शरद पवार की एनसीपी और सोनिया गांधी की कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हालांकि अभी कांग्रेस की तरफ से कोई भी जानकारी सामने नहीं आई है. शरद पवार ने साफ कह दिया है कि वह मुख्यमंत्री के रुप में उद्धव ठाकरे को देखना चाहते हैं, हालांकि अभी कांग्रेस अपने नेताओं के साथ बैठक करके गठबंधन पर अपना बयान देगी.

उद्धव ठाकरे नहीं संभालना चाहते थे शिवसेना की कमान ?

क्या आपको पता है कि जो उद्धव ठाकरे महारष्ट्र के मुख्यमंत्री पद पर बैठने जा रहे हैं वह कभी शिवसेना तो क्या राजनीति में आना ही नहीं चाहते थे.  एक समय वो आ गया जब बाला साहब ने ये भी कह दिया था कि में शिवसेना छोड़ रहा हूं लेकिन जनता ने साफ कह दिया कि हमें सरकार नहीं साहेब चाहिए. हालांकि बाला साहब नया उत्तराधिकारी चुनना चाह रहे थे और उन्होने राज ठाकरे को किनारे कर अपने तीसरे बेटे उद्धव को चुना. बड़े बटे जयदेव पहले ही नाराज थे और दूसरे बेटे बिंदु का पहले ही निधन हो चुका था.

अब उनके सामने सिर्फ एक ही चेहरा था उद्धव लेकिन वह अपनी फोटोग्राफी की दुनिया में मस्त रहते थे उन्हें राजनीति का इल्म ही नहीं था. उद्धव राजनीति में रुचि न रखने के कारण पार्टी में शामिल होना नहीं चाहते थे लेकिन वह अपनी मां अमीना ताई के कहने पर अपने मन को मारते हुए साल 1994 में राजनीति में शक्रिय हो गए.

राज ठाकरे के वो काम जो बाला साहब को नही थे पसंद ?

साल 1995 में महाराष्ट्र में पहली बार शिवसेना का मुख्यमंत्री बना और पार्टी ने इसकी जिम्मेदारी मनोहर जोशी को दी थी. सीएम भले जोशी हो लेकिन कमान बाला साहब ठाकरे के हाथ में थी और उनके भाई श्रीकांत के बेटे राज ठाकरे पार्टी के सबसे बड़े चहरे थे.

ये कहना भी गलत नहीं होगा कि राज ठाकरे ने ही सेना को युवाओं के बल आगे बढ़ाया था लेकिन एक समय वो आ गया कि बाला साहब का पुत्र मोह जाग जाग गया. या ये कहें कि राज ठाकरे के कुछ काम ऐसे थे जो बाला साहब को पसंद नहीं आ रहे थे और उन्होंने अपने बेटे को आगे करना शुरु कर दिया. वहीं राज बगावत पर आ गए और उन्होंने सेना से अलग निकलकर अपनी अलग पार्टी बना ली.

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