त्रिपुरा. कोरोना वायरस देश में इस समय अपने चरम पर पहुंच गया है. हर दिन हजारों की संख्या में लोगों की जान जा रही है. इसी बीच राज्य अपने- अपने स्तर पर कोविड के प्रसार रोकने के लिए नियम बनाए हैं. इस कड़ी में त्रिपुरा के अग्रतला से एक घटना सामने आई है जहां शादी में कोविड प्रोटोकॅाल तोड़ने कि जुर्म में  त्रिपुरा वेस्ट के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) डॉ. शैलेश कुमार यादव ने कार्यवाही की.

डीएम अपनी टीम के साथ दो मैरिज हॉल में छापा मारा. जो कोरोना की दूसरी लहर के प्रसार को रोकने के लिए शहर में रात के कर्फ्यू के बावजूद शादी के कार्यक्रमों की मेजबानी कर रहे थे. मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना सोमवार रात को हुई जब यादव ने दो मैरिज हॉल का दौरा किया और सीआरपीसी की धारा 144 के तहत जारी किए गए रात के कर्फ्यू आदेश का उल्लंघन करने के लिए उन्हें बंद करने का आदेश दिया.

बता दें कि कोविड के प्रसार पर अंकुश लगाने के लिए लागू की गई नाइट कर्फ्यू और अन्य मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का उल्लंघन करने के लिए एक विवाह पार्टी से 19 महिलाओं सहित 31 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि एक अन्य छापे में शहर में शादी की पार्टी, कोई रोक-टोक नहीं की गई.

जिला और पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नाइट कर्फ्यू नियमों और एसओपी के उल्लंघन की सूचना मिलने के बाद, यादव ने शहर के दो मैरिज हॉलों पर छापा मारा, जहां सोमवार देर रात विवाह पार्टियों में बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल थे.

सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया किया गया जिसमें डीएम एक शादी हॉल में दूल्हे का कॉलर से खींचते और पुजारी को थप्पड़ मारते दिखाई दे रहे हैं और पुलिस को आदेश दे रहे हैं कि सभी उपस्थित लोगों को कोविड-19 मानदंडों का उल्लंघन करने के लिए गिरफ्तार किया जाए.

घटनास्थल पर मौजूद मीडिया से बात करते हुए, यादव ने यह भी आरोप लगाया कि शादी के दलों के साथ हाथ मिलाने वाले पुलिसकर्मियों के एक वर्ग ने सरकारी आदेशों का उल्लंघन करते हुए समारोह आयोजित करने की अनुमति दी.

हालांकि इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद डीएम शैलेश कुमार यादव ने माफी मांगी है और कहा है कि उनका मकसद किसी की भावनाओं को आहत करने का नहीं था. वहीं सीएम बिप्लब कुमार देब ने इस मामले पर मुख्य सचिव मनोज कुमार को एक रिपोर्ट देने को कहा है.

अधिकारियों ने अगरतला नगर निगम क्षेत्र में रात 10 बजे से कोरोना नाइट कर्फ्यू लगा दिया है.आदेश में कहा गया है कि बंद स्थानों में, किसी भी सामाजिक, सांस्कृतिक, मनोरंजन या राजनीतिक सभा के लिए अधिकतम 50 प्रतिशत बैठने या हॉल की क्षमता की अनुमति होनी चाहिए, जबकि खुली जगहों पर 100 व्यक्तियों की छत के साथ उच्च संख्या की अनुमति दी जा सकती है. 200 व्यक्तियों की छत के साथ जमीन के आकार पर.

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