नई दिल्ली. त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने मंगलवार को कहा कि वह जलाशयों के पास रहने वाले लोगों को बतख बांटने की योजना बना रहे हैं, ताकि वे उन्हें पाल सकें और बतख पानी में अॉक्सीजन की मात्रा बढ़ाने में भी मदद करती हैं. उनके इस बयान का सोशल मीडिया पर जमकर मजाक बना. बिप्लब देब अपने पिछले कई बयानों के कारण ट्रोल हो चुके हैं. लिहाजा इस बार भी लोगों ने उनका खूब मजाक बनाया. बयान में बिप्लब देब ने कहा था, ”आज मैंने घोषणा की है कि 50 हजार बतख आसपास रहने वालों को दिए जाएंगे. इस जलाशय (नीलमहल तालाब) में जब 50 हजार सफेद बतख घूमेंगी तो कितनी सुंदर लगेंगी और उससे अॉक्सीजन भी रीसाइकल होती है.”
सच्चाई क्या है: इंडियन काउंसिल अॉफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन के वैज्ञानिक ए देबबर्मा ने सीएम बिप्लब देब के दावे को सही ठहराया है. उन्होंने कहा कि बतख वाकई में पानी में अॉक्सीजन का स्तर बढ़ाने में मदद करती हैं. बतख और मछली एक साथ पालने को इंटीग्रेटेड फार्मिंग कहा जाता है, जहां बतख का मलमूत्र मछली के विकास में मदद करता है.   

कुछ समय पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने भी एक चायवाले की तारीफ की थी, जिसने नाले से निकलने वाली गैस से चाय बनाने का दावा किया था. पीएम के इस दावे का भी लोगों ने जमकर मजाक बनाया गया था. कई लोगों ने इसे सिरे से खारिज करते हुए बकवास बताया. लेकिन इसके बाद एक न्यूज चैनल ने वीडियो के जरिए बताया कि वह चायवाला आखिर करता क्या था. इसे बाद में छोटा अविष्कार कहा गया.

क्या कहा था सीएम ने:

वैज्ञानिकों का क्या कहना है:

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