नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी जिसमें सिनेमा देखने जाने वाले लोगों को अपनी पसंद का खाना और पानी लेकर जाने की अनुमति दी थी. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन की ओर से मुकुल रोहतगी ने कहा कि हाईकोर्ट का आदेश तो कुछ ऐसा ही है जैसे ताज होटल में कोई अपनी व्हिस्की लेकर जाए और वहां सोडा की मांग करें.

मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन की याचिका में कहा गया था कि दर्शक अपने खाने के नाम पर क्या लाएंगे इसकी कोई गारंटी नहीं. इससे सुरक्षा को भी गम्भीर खतरा है. हाईकोर्ट ने कहा था कि सिनेमा देखने वालों को अपनी पंसद का खाना और पानी ले जाने पर रोक नहीं लगा सकते. इसके अलावा सिनेमा हाल मालिकों से कहा गया था कि वे हाल के भीतर ऐसे बोर्ड लगाएं जिस पर लिखकर लोगों से अपील की जाए कि वे वेस्ट फूड सिर्फ कूड़ेदान में फेंके.

हाईकोर्ट ने अपने अन्य आदेश जारी करते हुए सभी जिला उपायुक्तों से कहा था कि वे इसे सख्ती से लागू कराए यदि कोई सिनेमा मालिक इन आदेशों को नहीं मानता है तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाए. ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करो. बता दें कि हाई कोर्ट ने अपने अन्य आदेश में कहा था कि सिनेमाघरों में शाम 3 बजे के बाद के शो में 5 से 18 साल के युवाओं को जाने की अनुमति नहीं मिलेगी. हालांकि कोर्ट ने रविवार के दिन या फिर छुट्टी वाले दिन सिनेमाघरों में जा सकते हैं.

बता दें कि इससे पहले, महाराष्ट्र सरकार ने नागपुर में राज्य विधानसभा के मानसून सत्र में घोषणा की थी कि लोग 1 अगस्त से सिनेमाघरों के अंदर अपने घर का खाना ले सकते हैं. हालांकि, मल्टीप्लेक्स और सिनेमाघरों के मालिकों द्वारा विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार को अपना निर्णय वापस लेना पड़ा.

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