नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी विध्वंस मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई के स्पेशल जज एस.के. यादव की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट ने जज एस.के. यादव से पूछा कि आप किस तरीके से ट्रायल को तय वक्त में पूरा करेंगे? जज की अर्जी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को भी नोटिस जारी किया गया है. कोर्ट ने सील बंद लिफाफे में जानकारी देने को कहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जज से पूछा कि वह सीलबंद रिपोर्ट फाइल करें और बताए कि उनके द्वारा दो वर्ष में मामला निपटाने के आदेश को एक साल बीत चुके हैं. 19 अप्रैल, 2017 को ट्रायल पूरा करने के आदेश दिए गए थे. दरअसल पिछले साल 19 अप्रैल को बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और केंद्रीय मंत्री उमा भारती सहित बीजेपी और वीएचपी के 14 नेताओं के खिलाफ अयोध्या में ढांचा ढहाने की साजिश का मुकदमा चलाए जाने का आदेश दिया गया था.

कोर्ट ने नेताओं का मुकदमा रायबरेली की अदालत से अयोध्या प्रकरण की सुनवाई कर रहे लखनऊ के विशेष जज की अदालत में स्थानांतरित कर दिया था. साथ ही रोजाना सुनवाई कर दो साल में ट्रायल पूरा करने और ट्रायल पूरा होने तक न्यायाधीश का स्थानांतरण न किए जाने का भी आदेश दिया था. वही विशेष जज ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर कहा है कि अयोध्या मामले का ट्रायल निपटने तक जज का स्थानांतरण न किए जाने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश उनकी प्रोन्नति में आड़े आ रहा है. उन्होंने कोर्ट से आदेश मे बदलाव करने और हाईकोर्ट को उन्हें जिला जज पद पर प्रोन्नत करने का आदेश देने की मांग की है.

बताते चलें कि बाबरी विध्वंस मामले में दो साल की मियाद पूरी होने में अब सिर्फ 8 महीने का समय बचा है. सुप्रीम कोर्ट जानना चाहता है कि सीबीआई के विशेष जज एस.के. यादव बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी सहित अन्य नेताओं के खिलाफ केस के ट्रायल को शेष वक्त में किस तरह से पूरा करेंगे. अगर केस का ट्रायल तय समय सीमा में पूरा हो जाता है तो इसका फैसला 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव से पहले आ सकता है.

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