नई दिल्ली. महाराष्ट्र का सियासी नाटक सु्प्रीम कोर्ट पहुंच गया है. बीजेपी के देवेंद्र फडणवीस और एनसीपी के अजित पवार ने शनिवार को अहले सुबह मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली. जबकि बात चल रही थी शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के गठबंधन के सरकार बनाने की. सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस रमणा और जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की बेंच इस मामले की सुनवाई हुई. इस सुनवाई के बाद कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है और इस मामले पर कल सोमवार सुबह 10:30 पर सुनवाई होगी.

जिसमें कपिल सिब्बल ने कांग्रेस की तरफ से जिरह करते हुए कोर्ट में कहा कि बीजेपी के पास बहुमत नहीं है. बिना कैबिनेट बैठक के राष्ट्रपति शासन हटाया गया जो कि पूरी तरह गलत था.  कपिल सिब्बल ने ये भी कहा कि राज्यपाल केंद्र के निर्देश पर काम कर रहे हैं. गर्वनर ने फ्लोर टेस्ट के लिए तारीख ही नहीं दी और फडणवीस जल्द से जल्द बहुमत साबित करें.

अभिषेक मनु सिंघवी ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सीएम की शपथ का क्या आधार है और राज्यपाल की विधायकों से कब बात हुई. कोर्ट में सिंघवी ने ये भी कहा कि अजित पवार एनसीपी के विधायक दल के नता नहीं हैं और 41 विधायकों ने उन्हें अपना नेता नहीं माना है. इसके साथ ही सिंघवी ने कहा कि सोमवार को प्रोटेम स्पीकर चुना जाए. सिब्बल ने कहा कि राज्यपाल को बहुमत का भरोसा कैसे.

कपिल सिब्बल और सिंघवाी ने तुरंत फ्लोर टेस्ट कराए जाए. सुप्रीम कोर्ट ने लगातार फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया है चाहे वह यूपी में 1998 में हो या 2018 में कर्नाटक में. यह कैसे संभव हो सकता है कि जिसने कल बहुमत का दावा किया, वह आज फ्लोर टेस्ट से भाग रहा है.

सॉलिसिटर जनरल मुकुल रहतोगी ने कहा कि गवर्नर के फैसले में कोई जवाबदेही नहीं. सड़क से बुलाकर शपथ नहीं दिलाई थी और लोग अब आदेश की कॉपी मांग रहे हैं. पहले तो 3 हफ्ते तक लोग सोते रहे.

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