नई दिल्लीः मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय गृह में नाबालिग बच्चियों से रेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बिहार सरकार और शीर्ष जांच एजेंसी सीबीआई को नोटिस जारी किया है. यह नोटिस केस की जांच की रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध लगाने के पटना हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका पर जारी किया गया है. जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए नीतीश सरकार और केस की जांच कर रही सीबीआई से 18 सितंबर से पहले जवाब मांगा है. 18 सितंबर को केस की अगली सुनवाई होगी.

सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीशों की बेंच को जानकारी दी गई थी कि पटना हाईकोर्ट ने एक महिला वकील को बतौर न्याय मित्र नियुक्त किया है. उनसे कहा गया है कि वह आश्रय गृह जाए जहां पीड़ित बच्चियों को रखा गया है और उनका इंटरव्यू करें. इसका मकसद पीड़ितों का पुनर्वास बताया गया. सुप्रीम कोर्ट ने केस के संज्ञान में आते ही हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी. दरअसल इस केस की जांच की रिपोर्टिंग पर रोक लगाने के आदेश को पटना के रहने वाले एक पत्रकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

गौरतलब है कि इसी साल अप्रैल में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टिस) की रिपोर्ट में मुजफ्फरपुर स्थित बालिका आश्रय गृह में दर्जनों बच्चियों से रेप का खुलासा हुआ था. मेडिकल रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई थी. मामले के तूल पकड़ने के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार के खिलाफ हल्ला बोला. विपक्ष और जनता द्वारा किए जा रहे प्रदर्शनों के दबाव के बाद राज्य सरकार ने केस की जांच सीबीआई को सौंपी. इस मामले में बिहार सरकार में मंत्री मंजू वर्मा के पति का नाम आने के बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा. मासूम बच्चियों से रेप का असल गुनाहगार और बालिका आश्रय गृह का संरक्षक ब्रजेश ठाकुर गिरफ्तार किया जा चुका है.

मुजफ्फरपुर बालिका आश्रय गृह रेप केसः सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को लगाई फटकार, पूछा- क्यों दे रहे थे NGO को फंड?