नई दिल्लीः मुख्य न्यायाधीश आर सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में गुजरात उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ ने अहमदाबाद नगर निगम को पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट के घर पर अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के लिए निर्देशित एक न्यायाधीश के आदेश को बरकरार रखा है. जिसमें अदालत ने नागरिक निकाय को बिना किसी देरी के अपने आदेश का पालन करने को कहा. कोर्ट ने संजीव भट्ट की याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि हमने पहले आपको संरक्षण दिया था और अब सुनवाई के बाद याचिका खारिज की जाती है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मकान के अवैध हिस्से को गिराने पर 30 जुलाई तक रोक लगा दी थी.

इस मामले में गुजरात हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता संजीव भट्ट की पत्नी श्वेता भट्ट की उस याचिका को खारिज कर दिया गया था जिसमें अहमदाबाद नगर निगर द्वारा की जाऩे वाली तोड़फोड़ रोकने की मांग की गई थी. संजीव के पड़ोसी प्रवीनचंद्र पटेल ने संजीव भट्ट के खिलाफ शिकायत की थी जिसमें उन्होंने उनके हिस्से की जमीन में अपने घर का अवैध निर्माण किया है.

इस मामले में श्वेता भट्ट के वकील ने कोर्ट में सुनवाई के दौरान तर्क दिया कि सुनवाई के बिना एएमसी ने मनमाने ढंग से निर्णय लिया था. शहर के ड्राइव-इन क्षेत्र की सुशील नगर सोसायटी मे स्थित बंग्ला संयुक्त रूप से संयुक्त रुप से संजीव भट्ट और उनकी पत्नी श्वेता के नाम दर्ज है. इससे पहले ए जे देसाई के एक न्यायाधीश खंडपीठ ने नागरिक निकाय से एक सप्ताह के भीतर अवैध निर्माण को ध्वस्त करने के आदेश को लागू करने के लिए कहा था.

बता दें की संजीव भट्ट गुजरात कैडर के 1988 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. संजीव 2002 में गुजरात दंगो के बाद सुर्खियों में आए थे जब उन्होंने दंगो के बाद गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाए थे. जिसके बाद उन पर कई आरोप लगे जिसमें भट्ट को अहमदाबाद में सरकारी गाड़ी और पुलिस कमांडो का इस्तेमाल करने की वजह से बर्खास्त किया गया था.

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