पुणेः एससी-एसटी एक्ट में बदलाव को लेकर राजनीति के पटल पर घमासान मचा हुआ है. इस बीच संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के परपोते सुजात अंबेडकर का मानना है कि राजनीति में आरक्षण की जरूरत नहीं है. हालांकि सुजात इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि एससी-एसटी समुदाय में जो लोग आर्थिक तौर पर समृद्ध हो चुके हैं, उन्हें समुदाय के उन लोगों के लिए आगे आना चाहिए और उनकी मदद करनी चाहिए जो अभी भी हाशिए पर हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 26 मार्च को जब मुंबई के आजाद मैदान में हजारों की संख्या में दलित संगठनों से जुड़े लोग दक्षिणपंथी नेता संभाजी भिड़े (भीमा-कोरेगांव हिंसा के आरोपी) की गिरफ्तारी के लिए इकट्ठा हुए तो वहां एक 23 साल का लड़का अपनी बेबाकी और अपने स्टाइल से सबको आकर्षित कर रहा था. यह युवक कोई और नहीं बल्कि बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के परपोते सुजात अंबेडकर थे. पुणे स्थित फर्ग्युसन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में ग्रेजुएट और जर्नलिज्म में डिग्री हासिल कर चुके सुजात कहते हैं कि वह अपने पिता प्रकाश अंबेडकर की पार्टी ‘भारिपा बहुजन महासंघ’ के लिए काम करना चाहते हैं.

सुजात कहते हैं कि राजनीति में आरक्षण की जरूरत नहीं है. हालांकि वह मानते हैं कि नौकरी और शिक्षा के क्षेत्र में आरक्षण जारी रहना चाहिए. सुजात के अपने पिता प्रकाश अंबेडकर से इस बारे में विचार काफी मिलते हैं. प्रकाश अंबेडकर ने साल 2013 में एक इंटरव्यू में कहा था कि चुनावी राजनीति में एससी-एसटी समुदाय के लिए आरक्षण खत्म करने का वक्त आ गया है. सुजात कहते हैं कि उन्होंने अपनी शिक्षा में कभी भी आरक्षण का लाभ नहीं लिया है. वह कहते हैं कि जिस तरह से दलितों पर अत्याचार के मामले हर दिन बढ़ते जा रहे हैं, वह चाहते हैं कि वह जल्द अपना एक पोर्टल शुरू करें जो इस तरह के मुद्दों को प्रमुखता से उजागर करे.

बताते चलें कि एक टेबलॉयड के लिए काम कर रहे सुजात नोटिस पीरियड पर हैं. अपने पोर्टल को शुरू करने के लिए वह संस्थान से इस्तीफा दे चुके हैं. वह कहते हैं कि उनका पोर्टल हाशिए पर आ चुके लोगों के मुद्दों को सबके सामने रखेगा. मार्च 2016 में कॉलेज में सुजात और लेफ्ट छात्र संगठनों से जुड़े उनके दोस्तों का एक कार्यक्रम को लेकर एबीवीपी छात्र नेताओं से विवाद भी काफी सुर्खियों में था. हाल में एससी-एसटी एक्ट में बदलाव पर सुजात कहते हैं कि यही एक्ट है जो दलित समुदायों के हितों की रक्षा कर रहा है. इसमें किसी भी तरह का संशोधन नहीं किया जाना चाहिए. एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के उस बयान से सुजात असहमति जताते हैं जिसमें पवार कहते हैं कि भारत में अब जाति के आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जाना चाहिए.

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