लखनऊ. लोकसभा 2019 चुनाव के लिए अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी और मायावती की बहुजन समाज पार्टी का उत्तर प्रदेश में गठबंधन हो गया है. शनिवार को साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका ऐलान किया गया. दोनों पार्टियों के साथ आने से बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश में मुश्किलें खड़ी हो जाएंगी. 2014 में बीजेपी को उत्तर प्रदेश से 73 सीट मिली थीं. लेकिन आगामी चुनावों में सपा-बसपा गठबंधन होने से बीजेपी को सीटों का भारी नुकसान होगा. भले ही बीजेपी चीफ अमित शाह ने शुक्रवार को यूपी से 74 सीट जीतने का दावा किया हो लेकिन कुछ सर्वे बताते हैं कि बीजेपी को 15-20 सीटों का नुकसान हो सकता है. कैराना, फूलपुर और गोरखपुर में हुए उपचुनावों में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था. पिछले साल नवंबर में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी कहा था कि अगर महागठबंधन होता है तो बीजेपी यूपी से 15-20 सीट हार सकती है. 

फूलपुर में सपा उम्मीदवार नागेंद्र प्रताप सिंह पटेल ने बीजेपी के कौशलेंद्र सिंह पटेल को एक लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से हराया था. नागेंद्र पटेल को 3,42,922 वोट मिले थे. वहीं कौशलेंद्र को 2,83,462 वोट हासिल हुए थे. वहीं कैराना उपचुनावों में आरएलडी की प्रत्याशी तबस्सुम हसन ने बीजेपी की मृगांका सिंह को मामूली अंतर से मात दी थी. तबस्सुम हसन को सपा, बसपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी का समर्थन हासिल था. इन सभी पार्टियों ने इस सीट पर अपने उम्मीदवार नहीं उतारे थे.

हसन को 4,81,181 और सिंह को 4,36,564 वोट हासिल हुए थे. वहीं यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में भी बीजेपी को हार का स्वाद चखना पड़ा था. 2014 में इस सीट पर योगी विजयी हुए थे. सीएम बनने के बाद उन्हें यह सीट छोड़नी पड़ी थी. उपचुनाव में सपा के प्रवीण कुमार निषाद ने बीजेपी के उपेंद्र दत्त शुक्ला को मात दी थी. निषाद को 4,56,513 और शुक्ला को 4,34,632 वोट मिले थे. चूंकि यूपी की कई सीटों पर बहुजनों और मुस्लिमों का दबदबा है, लिहाजा वहां सपा-बसपा गठबंधन बीजेपी को साफ तौर पर भारी नुकसान पहुंचा सकता है. 

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