नई दिल्ली. लॉकडाउन में दूसरे शहरों या राज्यों में फंसे मजदूरों के लिए केंद्र सरकार ने श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलानी शुरू की. सैंकड़ों की त में ट्रेनें देश के अलग अलग हिस्सों में मजदूरों को लेकर पहुंची. परेशानी बस ये हुई कि कुछ ट्रेनें तो समय से मंजिल तक समय से पहुंच गई तो कुछ ट्रेनें घंटों और कई दिनों की देरी से भी पहुंची. कुछ ऐसी ही कहानी दिल्ली से बिहार के मोतिहारी जारी रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन के साथ भी हुई. आमतौर पर 30 घंटे में पूरी यात्रा तय करने वाली ट्रेन मोतिहारी तक 4 दिनों में पहुंची.

ट्रेन में सवार मजदूरों ने बताया कि उन्हें मोतिहारी का टिकट दिया गया लेकिन ट्रेन 4 दिनों में घुमा-घुमा कर पहुंची. मजदूरों ने कहा कि एक तो पहले ही वे मुसीबत के समय घर लौट रहे हैं और अब ये सफर भी मुसीबत बन गया है.

चौंकाने वाली बात ये है कि इस ट्रेन की यात्रा के दौरान एक महिला ने बच्चे को जन्म तक दे दिया. दरअसल दिल्ली से चलकर जब यह ट्रेन समस्तीपुर तक पहुंची तो महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई. आनन-फानन में महिला को ट्रेन से उतारा गया लेकिन फिर भी कोई मेडिकल इंतजाम न होने के बाद महिला ने प्लेटफार्म पर ही बच्चे को जन्म दे दिया. हालांकि, कुछ देर में बाद रेलवे अधिकारी की गाड़ी से महिला को अस्पताल पहुंचा दिया गया.

बता दें कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को लेकर लगातार विवाद मचा है. यहां तक की कई गाड़ियां तो अपने निर्धारित स्टेशन तक ही नहीं पहुंच पाई, बीच में गलती से दूसरी लाइन बदलकर किसी दूसरे शहर के दूसरे स्टेशन जा पहुंची. सोशल मीडिया पर भी लोग इस मामले में लगातार रेलवे मंत्रालय को घेर रहे हैं.

वहीं रेलवे के एक अधिकारी ने सफाई दी कि विभाग इस बात की पूरी कोशिश कर रहा है कि सभी ट्रेन सही और समय से निर्धारित मंजिल पर पहुंचे. उन्होंने कहा कि कई ट्रेने अनियमित तरह से चल रही हैं क्योंकि ट्रैक खाली नहीं है और साथ ही कई ट्रेनें शॉर्ट नोटिस पर भी चलाई जा रही हैं इस वजह से छोटी परेशानियां सामने आ रही हैं. हालांकि, विभाग इसमें सुधार कर रहा है.

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