नई दिल्ली/ अंधे प्रेम में आकर माता पिता समेत सात लोगों को कुल्हाड़ी से काटकर मौत के घाट उतारने वाली शबनम ने जान बख्श देने की गुहार लगाई है और दया याचिका दायर की है. शबनम की फांसी कुछ दिन टल सकती है. आजाद भारत में आजादी के बाद पहली बार किसी महिला को फांसी होने का मामला मीडिया में सुर्ख़ियो ने बना हुआ है और सुप्रीम कोर्ट के दो अधिवक्ता उसकी पैरवी में आए हैं. उन्होंने शबनम की तरफ से राष्ट्रपति को नए सिरे से फांसी माफी करने के लिए दया याचिका भेजी है. जेल प्रशासन ने शुक्रवार को शबनम की दया याचिका लखनऊ भेज दी है. शबनम की दया याचिका न्याय विभाग को भेजी गई और फिर वहां से राज्यपाल और राजभवन से राष्ट्रपति को भेजी जाएंगी.

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सुप्रीम कोर्ट से पुर्नविचार याचिका के साथ ही राष्ट्रपति ने शबनम की दया याचिका को भी खारिज कर दिया है. खैर कोर्ट ने अभी शबनम के डेथ वारंट जारी नहीं किए हैं. इसके बावजूद रामपुर जिला कारागार में बंद शबनम को मथुरा जेल में बने महिला फांसीघर में फांसी पर लटकाने की तैयारी की जा रही है.

14 अप्रैल 2008 को अंधे प्रेम में आकर शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर माता-पिता और मासूम भतीजे समते सात परिजनों की हत्या की थी. उस वक्त वह दो महीने की गर्भवती भी थी. शबनम के बेटे मुहम्मद ताज का जन्म जेल में ही हुआ था. उस वक्त मुहम्मद ताज को शबनम के दोस्त उस्मान सैफी ने गोद ले लिया था. आज ताज 12 साल का है. यह मामला अमरोहा जनपद के बावनखेड़ी गांव का है. बता दें कि कुल्हाड़ी से काटकर पूरे परिवार का कत्ल करने वाली शबनम जुलाई 2019 से रामपुर जेल में बंद है. आजादी के बाद वह पहली महिला है, जिसे फांसी होने वाली है. खैर मथुरा जेल में शबनम और प्रेमी सलीम को फांसी पर लटकाने कि तैयारियां चल रही है.

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