नई दिल्ली. आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने शुक्रवार को रेलवे टेंडर घोटाला मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और आरजेडी नेता प्रेम चंद्र गुप्ता सहित 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है. लालू यादव के परिवार पर आईआरसीटीसी के दो होटलों के टेंडर में हेराफेरी का आरोप है.

इस मामले में आरोप हैं कि लालू यादव ने रेल मंत्री रहते हुए रांची और पुरी में आईआरसीटीसी द्वारा चलाए जा रहे दो होटलों की देखरेख सुजाता होटल को सौंप दी. यह कंपनी विनय और विजय कोचर की है और इसके बदले उन्हें पटना में बेनामी कंपनी के द्वारा 3 एकड़ का प्लॉट मिला. सीबीआई पहले ही एक चार्जशीट फाइल कर चुकी है, जिसमें लालू, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव और 14 अन्य लोगों के नाम शामिल हैं.

इससे पहले झारखंड उच्च न्यायालय ने लालू प्रसाद यादव की अंतरिम जमानत रद्द कर दी और उनसे 30 अगस्त तक आत्मसमर्पण करने को कहा. 10 अगस्त को पूर्व नेता की जमानत याचिका की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा था कि वह अस्थायी जमानत पर घर में नहीं रह सकते हैं. लालू यादव को मई में इलाज के लिए छह सप्ताह की अंतरिम जमानत दी गई थी जिसे बाद में उच्च न्यायालय ने बढ़ा दिया था.

चारा घोटाले के एक मामले में दिसंबर 2017 को दोषी करार दिए जाने के बाद लालू रांची की बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में रखे गए थे. उन्हें जनवरी व मार्च 2018 में दो अन्य मामलों में दोषी करार दिया गया और 14 साल की जेल की सजा दी गई.

वह साल 2013 में चारा घोटाला मामले में पहली बार दोषी करार दिए गए थे और उन्हें पांच साल की जेल की सजा सुनाई गई थी. करोड़ों रुपये का चारा घोटाला लालू यादव के बिहार के मुख्यमंत्री रहने के दौरान 1990 के दशक में सामने आया था. पटना उच्च न्यायालय के निर्देश पर जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपा गया था.

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