पटना. बिहार में विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट शुरू हो गई है. सत्ताधारी सहयोगी दलों बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के दो आला नेता आपस में ही भिड़ गए हैं. बिहार के उप मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी और जेडीयू उपाध्यक्ष और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर इन दिनों ट्विटर पर एक दूसरे पर जमकर हमलावर हैं. प्रशांत किशोर जहां सुशील मोदी को बकायदा टैग करके लिख रहे हैं कि पिछले चुनावों में हार के बावजूद आप उप मुख्यमंत्री बन गए लेकिन मत भूलिए कि जनता ने बीजेपी को हराया था और नीतीश कुमार को जिताया था. वहीं सुशील मोदी ने जवाब देते हुए लिखा है कि दोनोें दलों में सब बेहतर है लेकिन कुछ लोग जो डेटा जुटाने और अपना संगठन चला रहे हैं वो भ्रम फैला रहे हैं. मोदी ने लिखा कि निजी हित में लगा व्यक्ति राष्ट्र हित को प्राथमिकता नहीं देगा. 

बता दें कि बिहार में बीजेपी और जेडीयू डेढ़ दशक से साथ थे. हालांकि 2014 में नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के विरोध में नीतीश कुमार ने बीजेपी से रिश्ता तोड़ लिया था. इसके बाद 2015 में हुए बिहार विधानसभा चुनावों में जेडीयू ने अपने चिर प्रतिद्वंदी लालू यादव की राजद के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और सरकार भी बनाई. हालांकि तेजस्वी यादव पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद नीतीश कुमार ने राजद से नाता तोड़ दोबारा बीजेपी का दामन थाम लिया था. तब से दोनों पार्टियां साथ हैं लेकिन बिहार में बड़े भाई की भूमिका में बीजेपी खुद को देखना चाहती थी. 

हालांकि जिस तरह बीजेपी को एक के बाद एक कई राज्यों में चुनावी हार का सामना करना पड़ा है, ऐसा लगता नहीं कि बिहार में बीजेपी कोई विवाद खड़ा करना चाहेगी. बता दें कि प्रशांत किशोर ने हाल ही में पारित हुए नागरिकता संशोधन कानून का भी पुरजोर विरोध किया था. हम आपको प्रशांत किशोर और सुशील मोदी के बीच चल रहे सोशल मीडिया युद्ध की झलकियां पढ़वाते हैं. 

सुशील मोदी ने कहा- नागरिकता कानून और एनपीआर पर भ्रम फैलाकर अपनी कंपनी का फायदा चाहते हैं प्रशांत किशोर

सुशील मोदी ने आगे कहा- दोनों पार्टियों में समझौता है, नीतीश की अगुवाई में लड़ेंगे चुनाव लेकिन डाटा जुटाने वाले लोग गड़बड़ी कर रहे

प्रशांत किशोर का पलटवार- परिस्थितिवश डिप्टी CM बने सुशील मोदी से राजनीतिक मर्यादा पर भाषण सुनना सुखद

बिहार में नीतीश कुमार का नेतृत्व और JDU की सबसे बड़े दल की भूमिका बिहार की जनता ने तय किया है, किसी दूसरी पार्टी के नेता या शीर्ष नेतृत्व ने नहीं. 2015 में हार के बाद भी परिस्थितिवश DY CM बनने वाले से राजनीतिक मर्यादा और विचारधारा पर व्याख्यान सुनना सुखद अनुभव है.

बता दें कि बिहार में 2020 में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. ऐसे में दोनों पार्टियों में सीटों के बंटवारे पर अभी बात होनी है. प्रशांत किशोर और सुशील मोदी की यह जुबानी जंग दबाव की राजनीति का हिस्सा भी हो सकती है जिसके नीतीश कुमार पुरोधा हैं. बिहार में एनडीए के सामने राजद, कांग्रेस, हम, रालोसपा का महागठबंधन होगा. 

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