कोलकाता. जहां देश में पेट्रोल की कीमत आसमान छू रही हैं, वहीं जमीन में उगला आलू में भी सामान्य वर्ग के लोगों की जेब पर भारी पड़ता नजर आ रहा है. दरअसल सिर्फ पश्चिम बंगाल में ही आलू की कीमतें 20 रुपए प्रति किलो से पार हो गई हैं. कुछ क्षेत्रों में आलू की कीमत में काफी ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिली है. यही नहीं दार्जिलिंग की पहाड़ियों में आलू की बिक्री 30 प्रति किलो से 35 रुपये प्रति किलो तक हो रही है. ऐसे में जहां लोग बढ़ती हुई ईंधन की कीमतों का सामना करने की कोशिश कर रहे हैं वहीं आलू की कीमतें भी उनके लिए परेशानी का सबब बनती जा रही हैं.

गौरतलब है कि इस मामले में आलू का कारोबार करने वाले लोगों ने दावा किया है कि अगले कुछ हफ्तों में कीमतें घटने की संभावना नहीं है. दरअसल राज्य में आलू की कीमत में वृद्धि के कई बड़े कारण हैं. हाल ही में हुए पंचायत चुनावों के चलते भी आलू के दामों पर काफी असर पड़ा है. क्योंकि अधिकतक ग्रामीण लोग चुनावों में लगे हुए थे. वहीं इस मामले में पश्चिम बंगाल कॉल्ड स्टोर संघ के पूर्व अध्यक्ष पटित पाबन का कहना हैकि कम उत्पादन आलू की कीमतों में वृद्धि का कारण है.

वहीं एक थोक व्यापारी जगदीश ने कहा, आलू का कम उत्पादन बाजार में इसके उतार-चढ़ाव दर के पीछे सबसे बड़ा कारण है. आलू की कीमत अभी भी वहीं रहने का अनुमान है. इसके साथ ही अभी इसकी कीमतें बढ़ने की भी संभावनाएं हैं. आलू की बढ़ती मंहगाई के चलते ही आलू की में बिक्री में भी भारी गिरावट आई है. वहीं एक दूसरे थोक व्यापारी परेश बरुई का कहना है कि आलू की बढ़ती किमतों में चुनाव से जुड़े लोगों की भागीदारी है, जो साथ में आलू के विक्रेता भी हैं. हालांकि बाजार में आलू की कीमत 20 रुपये से कम होकर 17-18 रुपये तक हो गई है. इसके साथ ही असम, उड़ीसा और कर्नाटक राज्यों में आलू का निर्यात होना भी वृद्धि दर का कारण है.

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