पटना. जन अधिकारी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद पप्पू यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सूत्रों के मुताबिक 32 साल पुराने एक अपहरण केस में पप्पू यादव की मंगलवार को पटना में गिरफ्तारी हुई। जिसके बाद उन्हें मधेपुरा लाया गया, जहां कोर्ट ने पप्पू यादव को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

साल 1989 में बिहार के मधेपुरा जिले के कुमारखंड थाने में अपहरण मामले में पप्पू यादव पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इस मामले में 22 मार्च को कोर्ट ने उनके खिलाफ वारंट जारी किया था। जिसमें वो उपस्थित नहीं हो सके। अब पुलिस ने उन्हें कोर्ट की अवमानना के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है।

समर्थकों का विरोध

गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने के विरोध में पूर्व सांसद पप्‍पू यादव के समर्थक और पार्टी कार्यकर्ताओं ने गुस्सा जाहिर किया है। समर्थकों ने कहा कि पप्‍पू यादव को साजिश के तहत जेल भेजा गया है। बिहार सरकार और भाजपा ने अपनी नाकामी छुपाने के लिए यह किया है। वो जल्द ही इस फैसले के खिलाफ आंदोलन करेंगे और अनशन पर भी बैठेंगे।

पुलिस काफिले को रोका

जाप सुप्रीमो पप्पू यादव को मधेपुरा ले जाए जाने के क्रम में कार्यकर्ताओं ने पुलिस के काफिले को रोका और जमकर नारेबाजी की। जैसे ही पुलिस का काफिला एनएच 19 पर पासवान चौक के पास पहुंचा कि जाप कार्यकर्ता काफिले के सामने आ गए और पुलिस की उस गाड़ी पर चढ़ गए, जिसमें पप्पू यादव बैठे हुए थे। जिसके बाद कुछ देर तक हंगामा होता रहा।

इससे पहले पप्पू यादव ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा था कि मुझे भाजपा के इशारे पर गहरी साजिश के तहत जेल भेजा जा रहा है, जबकि मैंने पिछले डेढ़ महीने से नीतीश कुमार की ही मदद की लोगों को बचा कर. मैं नीतीश कुमार से पूछना चाहता हूं कि आखिर जो मामला हाई कोर्ट में लंबित है, उस मामले में कोरोना काल मे गिरफ्तारी क्या जरूरी थी?

मालूम हो कि पप्पू यादव ने सारण पहुंच कर अमनौर के जयप्रभा सामुदायिक केंद्र पर 30 से अधिक एंबुलेंस रखने का मामला उठाया था। इसके बाद इस मामले में तूल पकड़ लिया।

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