नई दिल्ली. बिहार के मुजफ्फरपुर में इंसेफ्लाइटिस यानी चमकी बुखार से हुई बच्चों की मौत के मामले में बिहार की नीतीश कुमार सरकार के बाद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है. हालांकि, स्वास्थ्य सेवाएं राज्य सूची के अंतर्गत आती हैं लेकिन इस विकट परिस्थिति में केंद्र सरकार ने बिहार सरकार को इससे निपटने में मदद की और पूरी तरह सपोर्ट किया है. केंद्र सरकार ने हलफनामे में कहा कि मुजफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में 100 बिस्तरों वाला बच्चों का ICU शुरू किया जाएगा. केंद्र सरकार के सहयोग से एक साल के भीतर ही ICU की सेवा शुरू कर दी जाएगी. केंद्र के हलफनामे के अनुसार, बिहार के पांच अलग अलग क्षेत्रों के जिलों में वायरोलॉजी लैब बनाई जाएंगी. इसके साथ ही 10-10 बिस्तरों वाले ICU भी शुरू किए जाएंगे.

चमकी बुखार की चपेट में आकर हुई 150 से अधिक बच्चों की मौत ने देशभर को हिला दिया. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने हलफनामे में यह भी कहा कि इस घटना की जड़ तक जाने के लिए एक्सपर्ट पैनल का गठन किया जाएगा. वहीं केंद्र सरकार ने बिहार में डॉक्टर, नर्स और लैब की कमी को पूरा करने के लिए राज्य सरकार से मदद करने के लिए कहा है.

बता दें कि केंद्र से पहले बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर माना कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमाई हुई हैं. स्वास्थ्य विभाग के सभी स्तरों पर 50 प्रतिशत पद खाली हैं, इतना ही नहीं सरकार ने बताया कि विभाग में 47 प्रतिशत डॉक्टर्स की कमी है, 71 प्रतिशत नर्सों के पद खाली हैं. नीतीश कुमार ने हलफनामे में कहा है कि प्रदेश में उपलब्ध मानव संसाधनों में भारी कमी है. सरकार ने कहा कि मुजफ्फरपुर समेत बिहार में आए चमकी बुखार से होने वाली बच्चों की मौतों के मामले पर सीएम नीतीश कुमार की पूरी नजर थी. सरकार बिमारी पर काबू पाने की पूरी कोशिश कर रही है.

Nitish Govt Reply to SC Admits Bihar Medical Services in ICU: मुजफ्फरपुर चमकी एईएस बुखार से मौत पर सुप्रीम कोर्ट में नीतीश सरकार का जवाब एक कबूलनामा- आईसीयू में है बिहार मेडिकल सर्विस, इलाज कैसे हो जब डॉक्टरों के 47 और नर्स के 71 परसेंट पद खाली

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