भोपाल. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद सोनिया गांधी की कांग्रेस को छोड़कर मध्य प्रदेश की राजनीति में तूफान लाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया अब भाजपा में शामिल हो गए. सिंधिया के कांग्रेस को इस्तीफे और भारतीय जनता पार्टी में आने के बाद सूबे की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई.

दरअसल सिंधिया के समर्थन में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के 6 मंत्री समेत 22 विधायक भी हैं जो अपना इस्तीफा पार्टी को सौंप चुके हैं. अब आंकड़ों पर नजर डालें तो विधानसभा की कुल संख्या 228 से घटकर 206 हो गई है और विधायकों के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के पास 88 अपने और 4 निर्दलीय विधायक बचे हैं.

मध्य प्रदेश की विधानसभा में बहुमत के लिए अब 104 विधायकों की जरूरत है जो संख्या कमलनाथ सरकार के पास नहीं है. इसी वजह से राज्य की अल्पमत में आ गई है. दूसरी ओर शिवराज सिंह चौहान की बीजेपी का दावा है कि कांग्रेस सरकार के पास बहुमत नहीं है जबकि भाजपा के पास पूर्ण बहुमत है क्योंकि मौजूदा समय में भारतीय जनता पार्टी के पास 106 विधायक हैं.

मध्य प्रदेश में अचानक आए सियासी भूचाल के बाद बैठकों का दौर भी जारी हो चुका है. भाजपा और कांग्रेस अपने विधायक दलों की बैठक आयोजित कर चुकी है. कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों राजस्थान के जयपुर के एक रिसॉर्ट में भेज दिया जबकि बागी 22 विधायकों की बेंगलुरू में होने का दावा है. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी कर्नाटक की तरह यहां भी विधायकों की खरीद फरोख्त कर रही है.

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