भोपाल. मध्य प्रदेश की सियासत ने 15 महीनों में ही रुख मोड़ लिया. ज्योतिरादित्य ने कांग्रेस क्या छोड़ी, कमलनाथ सरकार ही गिर गई और भाजपा की सत्ता पर बैठने की उम्मीदें अब विश्वास में बदल गईं. कमलनाथ के इस्तीफे के बाद अब शिवराज सिंह चौहान या नरोत्तम मिश्रा सूबे की कमान संभालेंगे.

पिछले 17 दिनों में मध्य प्रदेश में जमकर सियासी खेल चला. इसकी शुरुआत कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे ज्यतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफे से हुई. सिंधिया के साथ 22 विधायकों ने भी अपना इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दिया. इन विधायकों में 6 मंत्री भी शामिल थे.

कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी पर खरीद फरोख्त का आरोप लगाया. इस दौरान बागी विधायकों को बेंगलुरू के एक रिसॉर्ट में भेज दिया गया. विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार अल्पमत में आ गई. लेकिन अभी विधानसभा अध्यक्ष का इस्तीफे स्वीकार करना बाकी था.

विधानसभा अध्यक्ष ने शुरुआत में 6 इस्तीफे स्वीकार किए. ऐसे में कमलनाथ सरकार बागी विधायकों को मनाने की पूरी कोशिश में जुटी रही. इस बीच भाजपा ने राज्यपाल लालजी टंडन से मिलकर राज्य सरकार के अल्पमत में होने का दावा किया. जिसके बाद राज्यपाल ने कमलनाथ सरकार से फ्लोर टेस्ट की बात कही.

विधानसभा सत्र शुरू होने के पहले दिन कमलनाथ सरकार को बहुमत परीक्षण देना था लेकिन उससे पहले ही विधानसभा स्पीकर ने सदन को 26 मार्च तक के लिए कोरोना वायरस के मद्देनजर जनहित में स्थागित कर दिया. विधानसभा अध्यक्ष की कार्यवाही से नाराज बीजेपी इस बात को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई.

गुरुवार 19 मार्च कमलनाथ सरकार के लिए अच्छा साबित नहीं हुआ. पहले सुप्रीम कोर्ट ने कमलनाथ सरकार को 20 मार्च की शाम तक फ्लोर टेस्ट करने के लिए कहा. फिर विधानसभा अध्यक्ष ने बाकी सभी विधायकों के इस्तीफे मंजूर कर लिए. इस्तीफों को मंजूर करने के बाद सदन की संख्या 228 से घटकर 206 रह गई.

मध्य प्रदेश में अब बहुमत साबित करने के लिए 104 विधायकों की जरूरत होगी. ऐसे में कांग्रेस के खेमे में अब सिर्फ 92 विधायक हैं जबकि भारतीय जनता पार्टी के पास 107 विधायक हैं जो बहुमत साबित करने के लिए भी काफी हैं. अब देखना दिलचस्प रहेगा कि 15 महीने के बाद शिवराज सिंह चौहान कब तक चलाएंगे सरकार.

MP CM Kamal Nath To Resign: मध्य प्रदेश में गिर गई कांग्रेस सरकार, फ्लोर टेस्ट से पहले कमलनाथ का इस्तीफे का ऐलान

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