गुवाहाटी. असम के सिलचर एयरपोर्ट पर तृणमूल कांग्रेस पार्टी (टीएमसी) के नेताओं को कथित तौर पर हिरासत में लिए जाने और हाथापाई के मामले पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को केंद्र और असम सरकार पर निशाना साधा. यह प्रतिनिधिमंडल सोमवार को जारी किए गए नेशनल रजिस्ट्रार अॉफ सिटीजनशिप (एनआरसी) के खिलाफ एक सम्मेलन में भाग लेने के लिए दो दिनों के लिए असम दौरे पर था. इस प्रतिनिधिमंडल में 6 सांसद, 1 विधायक और प.बंगाल के शहरी विकास मंत्री शामिल थे.

मीडिया से बातचीत में टीएमसी सुप्रीमो ने इसे ‘सुपर इमरजेंसी’ बताते हुए कहा, ”एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल असम के लोगों से मिलना चाहता था. उन्हें एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकलने दिया गया. केंद्र के साथ-साथ असम सरकार एेसा बर्ताव क्यों कर रही है? यह राजनीतिक शत्रुता है. बीजेपी सिर्फ जोर जबरदस्ती करना जानती है”. उन्होंने कहा, अगर इलाके में धारा 144 लगाई गई है तो दो लोगों का समूह प्रभावित लोगों से मिलने क्यों नहीं जा सकता?

प.बंगाल की मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी के सांसदों के साथ असम पुलिस ने हाथापाई की, जिसमें महिला सदस्य भी थीं. केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए ममता ने कहा कि यह उनके अंत की शुरुआत है. वह अब हताश हो चुके हैं. इसलिए वे गुंडों जैसा बर्ताव कर रहे हैं. इससे पहले पश्चिम बंगाल बीजेपी के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा कि अगर पार्टी सत्ता में आती है तो राज्य में भी एनआरसी कराया जाएगा. उनके इस बयान पर ममता ने कहा, वे हैं कौन? उनका पश्चिम बंगाल में क्या महत्व है? कोई उन्हें नहीं जानता.

अगर वे राज्य में एनआरसी लागू करते हैं तो उनके अस्तित्व पर ही सवाल खड़े हो जाएंगे. असम में एनआरसी की मुखर विरोधी बनर्जी ने कहा कि 40 लाख लोग जिनके नाम सूची में नहीं हैं, वे इस देश के परिवार के सदस्य हैं. उन्होंने कहा, “वे लोग कई राज्यों से संबंध रखते हैं. वे लोग हमारे परिवार के सदस्य है. उन्हें लोगों को यहां से जाने के लिए नहीं कहना चाहिए.”

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